Hariyali Amavasya 2026
सावन के महीने में झूले खाने पहुंचे बच्चों और महिलाओं को मिली सिर्फ निराशा; वन विभाग के रवैये पर उठे गंभीर सवाल, नियमित खोलने और गार्ड तैनात करने की मांग
अरावली पर्वत श्रृंखला के बीचों बीच बनाई गई है, लव कुश वाटिका
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टोंक। वन विभाग द्वारा शहर के अरावली पर्वत श्रृंखला (Aravalli Hills) के बीच आंतड़ियाँ के बाला जी वन क्षेत्र में महिलाओं विशेषकर बच्चों के खेल कूद आदि मनोरंजन के लिय करीब दो करोड़ रुपये की लागत से निर्मित की गई लव-कुश वाटिका Love Kush Vatika Tonk,का ताला वन विभाग की लापरवाही के चलते हरियाली अमावस के अवसर पर बच्चों एवं महिलाओं के मनोरंजन के लिय नहीं खुल सका।
प्राप्त जानकारी के अनुसार करोड़ों रुपयों की लागत से बच्चों एवं महिलाओं के मनोरंजन के लिय वन विभाग द्वारा बनाई गई लव कुश वाटिका विभाग की अनदेखी के चलते इन दिनों अपनी बदहाली पर शर्मशार हो कर आंसू बहा रही है, जिसके चलते बुधवार को विशेष तौर पर सावन मास की हरियाली अमावस्या के दिन पहाड़ी पर बने बाबा अमरनाथ मंदिर जाने वाले श्रद्धालु , महिलाएं एवं बच्चे कुछ देर लव कुश वाटिका में भ्रमण कर वहां लगे झूलो आदि पर अपने बच्चों को लेकर यहां पहुंचे लेकिन उन्हें यह देखकर निराशा एवं आश्चर्य हुआ कि सावन का महीना और वह भी हरियाली अमावस जिस पर महिलाएं एवं बच्चे झूलों का आनंद उठाने के लिय झूले डालते हे, लेकिन अफसोस इस अवसर पर लव कुश वाटिका पर लगा वन विभाग का ताला नहीं खुल पाया, इस कारण वहां से गुजरने वाले बच्चों महिलाओं को भारी निराशा का सामना करना पड़ा, जो दिनभर शहर में चर्चा का विषय रहा। विभाग की कार्यवाही के चलते पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विकसित की गई लव कुश वाटिका का लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है।
सावन के महीने में बड़ी संख्या में महिलाएं , बच्चे बाबा अमरनाथ पहाड़ी की ओर आते-जाते हैं। इसी मार्ग पर लव-कुश वाटिका भी स्थित है। ऐसे में यहां आने वाले लोगों के लिए यह प्राकृतिक वातावरण में कुछ समय बिताने और बच्चों के मनोरंजन का अच्छा स्थान है, लेकिन वाटिका के गेट पर ताला लगा रहने से इसका उद्देश्य ही सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब करोड़ों रुपये खर्च कर पर्यटन स्थल विकसित किया गया है तो इसे आमजन के लिए नियमित रूप से खोलना चाहिए। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को वाटिका की नियमित निगरानी के साथ दिन के समय यहां वन कर्मचारी की तैनाती करनी चाहिए। इससे पर्यटकों को सुविधा मिलेगी और वाटिका की देखरेख भी बेहतर तरीके से हो सकेगी। लोगों का सवाल है कि यदि पर्यटन स्थल को आमजन के लिए खोलना ही नहीं है तो करोड़ों रुपये खर्च कर इसे विकसित करने का उद्देश्य क्या है?। शहरवासियों ने मांग की है कि लव-कुश वाटिका को नियमित रूप से खोला जाए एवं यहां सुरक्षा, साफ-सफाई तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं, ताकि इसका वास्तविक लाभ शहरवासियों एवं बाहर से आने वाले पर्यटकों को मिल सके।

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