JKK में इंडियन स्कल्पचर पर 'आर्ट टॉक' और 'थियेटर' सेशन का हुआ आयोजन

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- 'ऑनलाइन लर्निंग - चिल्ड्रन्स समर फेस्टिवल' का 27 जून तक होगा आयोजन


- शुक्रवार को कल 'थियेटर' सेशन का संचालन करेंगीं काजल सूरी


जयपुर, 28 मई। जवाहर कला केंद्र (जेकेके) की ओर से साप्ताहिक आर्ट टॉक्स सीरीज के तहत 'अ जर्नी विद इंडियन स्कल्पचर थ्रू द एजेज' विषय पर आर्ट टॉक का आयोजन किया गया। इस टॉक का संचालन प्रख्यात कला इतिहासकार डॉ.विजय माथुर ने किया। यह टॉक प्राचीन भारतीय कला और विभिन्न युगों में इसके महत्त्व पर केंद्रित रही। इसमें सिंधु घाटी सभ्यता, मौर्य साम्राज्य, गुप्त वंश के साथ-साथ वाकाटका साम्राज्य के काल पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

आर्ट टॉक की शुरूआत भारतीय कला के संक्षिप्त परिचय से हुई। इसके बाद, इतिहासकार ने सिंधु घाटी सभ्यता पर चर्चा करते हुए मोहनजोदड़ो और हड़प्पा सभ्यता की कला के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस सभ्यता के निशान कालीबंगा, रोपड़, राखीगढ़ी, बनावली जैसे विभिन्न स्थलों में पाए गए। इसी तरह, उन्होंने चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल से आरंभ करते हुए मौर्य काल के बारे में भी बताया। इसके बाद उन्होंने 'सम्राट अशोक' के शासनकाल पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि अशोक को क्यों अशोक स्तंभ, शिलालेख और लोगों के कल्याण के लिए विभिन्न स्मारकों की स्थापना करने के लिए याद किया जाता है। दर्शकों को उस दौर की कला की झलकियां भी दिखाई गई।

इसके बाद, डॉ. माथुर ने 'शुंग वंश' पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इसकी स्थापना ब्राह्मण कमांडर-इन-चीफ़, पुष्यमित्र ने की थी। पुष्यमित्र ने मौर्यों के अंतिम सम्राट की हत्या करके इस वंश की स्थापना की थी। उन्होंने आगे बौद्ध धर्म के दो विद्यालयों, 'हीनयान' और 'महायान' के बारे में चर्चा की । 'हीनयान' पूजा के प्रतीकात्मक स्वरूप में विश्वास करते थे, जबकि, 'महायान' में बुद्ध को 'ईश्वर' माना गया। 'शुंग आर्ट' में प्रतीकात्मक स्वरूप दर्शाया गया है। बुद्ध के पदचिह्न, खाली सिंहासन, बोधि वृक्ष से इस आर्ट को पहचाना जा सकता है।

थियेटर' सेशन थियेटर स्ट्रेटजिस्ट राजू कुमार ने सिखाए थिएटर के गुर

आर्ट टॉक सेशन के बाद 'ऑनलाइन लर्निंग - चिल्ड्रन्स समर फेस्टिवल' के 11वें दिन 'थियेटर' सेशन का आयोजन किया गया। सेशन का उद्देश्य थियेटर प्रेमियों को स्टेज पर परफॉर्मेंस के दौरान चेहरे और आंखों के जरिए अपनी भावनाओं एवं अभिव्यक्ति को व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित करना था। इस सेशन का संचालन थियेटर स्ट्रेटजिस्ट राजू कुमार ने किया। 



सेशन की शुरूआत में थियेटर एक्टर के लिए इमोशंस और एक्सप्रेशंस के महत्त्व को समझाया गया। इसके बाद कलाकार ने 'नवरस' के 9 भावों  -- श्रृंगार (लव एंड ब्यूटी), हास्य (जॉय एंड लॉफ्टर), करुणा (सॉरो एंड कम्पेशन), भयानक (फीयर), अद्भुत (सरप्राईज), आदि को प्रदर्शित किया। इसके बाद स्टोरीटेलिंग सेशन का आयोजन हुआ जिसमें कुछ दोस्तों के जन्मदिन के सेलिब्रेशन में शामिल होने और उनके साथ होने वाली विभिन्न घटनाओं को कहानी के माध्यम से बताया गया। दर्शकों को सेशन के दौरान सीखे गए एक्सप्रेशंस को रिकॉर्ड करके उन्हें जेकेके में भेजने का कार्य दिया गया।

शुक्रवार, 29 मई का कार्यक्रम


शुक्रवार, 29 मई को परफॉर्मिंग आर्ट्स ऑनलाइन सेशन के तहत शाम 5 से 6 बजे तक 'थियेटर' सेशन का आयोजन होगा। जिसका संचालन काजल सूरी करेंगीं। यह सेशन थियेटर में वॉयस मॉड्यूलेशन और डिक्शन पर केंद्रित होगा।

उल्लेखनीय है कि ऑनलाइन लर्निंग सेशंस जेकेके के फेसबुक पेज https://www.facebook.com/jawaharkalakendra.jaipur/ पर लाइव दिखाए जाएंगे।

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