चाकसू एसडीएम की धर्मपत्नी बनी जरूरतमंदों के लिए मसीहा प्रशासनिक दायित्वों के साथ-साथ सामाजिक सरोकार भी

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अनूठी पहल-- एसडीएम चाकसू व धर्मपत्नी विकास सहारण जरूरतमंदों तक पहुंचा रहे मदद



चाकसू/ फकरुद्दीन खान ✍️

         विश्वव्यापी महामारी को लेकर देश में चल रहे लॉकडॉउन की वजह से लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। इससे मजदूर और गरीब तबका सबसे ज्यादा परेशान है। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की वजह से लोगों का काम ठप हो गया है, जिसके चलते गरीबों और मजदूरों को खाने, पीने और रोजमर्रा की जरूरत की चीजों की कमी से जूझना पड़ रहा है।
           इन सबके बीच बहुत से लोग ऐसे भी हैं, जो इन जरूरतमंद लोगों की मदद कर रहे हैं। चाकसू में भी इसी तरह एक महिला जरूरतमंदों के लिए मसीहा बनकर लगातार जरूरतमंद लोगों की सहायता में लगी है। यह मसीहा महिला लॉकडाउन में खुद ही के घर में तैयार भोजन लेकर बाहर निकलती है और जरूरतमंद व्यक्तियों मे बांटती है, ताकि इस संकट की घड़ी में कोई भूखा न रहे और सभी तक मदद पहुंच जाए।


         जनता कर्फ्यू के बाद पूरे देश में लगाए गए लाकडॉउन के कारण बहुत लोग इधर-उधर फंसे हुए हैं। इनमें कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो रोज कमाकर खाने वाले हैं। लॉकडाउन की वजह से इन लोगों के लिए खाने का संकट पैदा हो गया है। विपदा के ऐसे दौर में प्रशासनिक अमले का एक परिवार ऐसा भी है जो खुद जरूरतमंद लोगों से सम्पर्क करता है और उन तक भोजन पहुंचाता है।



             महामारी से उपजे संकट के इस दौर में हर सक्षम व्यक्ति तन-मन-धन से जरूरतमंद का मददगार बनकर अपना राष्ट्रधर्म निभा रहा है। जयपुर जिले के चाकसू उपखंड अधिकारी ओमप्रकाश सहारण जहां अपने प्रशासनिक दायित्वों को निभा रहे हैं, वहीं उनकी धर्मपत्नी विकास सहारण लॉकडाउन के इस दौर में रोजाना 100 से अधिक जरूरतमंद दिहाड़ी मजदूरों को खाना खिलाकर अपने सामाजिक सरोकार निभा रही हैं।
           उच्च शिक्षा प्राप्त विकास सहारण अलसुबह उठती हैं। खुद सब्जी काटती हैं, आटा गूथती हैं, चावल पकाती है और फिर तैयार खाने को पैकेट में डालने तक का काम वो खुद करती हैं।
           इस काम में उनकी दो बेटियां नव्या और पूर्वा भी हाथ बंटाती हैं। पूरा सहारण परिवार सुबह के चार घंटे खाना बनाने में लगाता है। सुबह के आठ बजते-बजते उपखंड अधिकारी सहारण जरुरतमंद 100 लोगों का खाना लेकर रवाना होते हैं।
           सामाजिक सरोकार से निवृत्त होने के उपरांत एसडीएम ओमप्रकाश सहारण अपने प्रशासनिक दायित्वों का निर्वाह भी मुस्तैदी के साथ कर रहे है।


           विकास सहारण का कहना है कि वे इस मदद को लगातार जारी रखेंगी। एसडीएम सहारण और उनकी पत्नी साथ-साथ निकलते हैं। दोनों अपनी गाड़ी से पहले जाकर मुहल्ले या बस्ती में किसी बड़े बुजुर्ग से मिलते हैं और उससे पूछते हैं कि खाने की सबसे ज्यादा जरूरत किसको है? इसके बाद लोगों की जरूरत के हिसाब से खाने के पैकेट देना शुरू करते है।

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