जेइसीआरसी यूनिवर्सिटी के युवाओं को 'इक्सोरियल' (Ixoreal Biomed) की चेयरपर्सन ने दिए उद्यमिता के मूल मंत्र
Synopsis: महिला सशक्तिकरण का प्रतीक भगवती बल्दवा ने श्रीडूंगरगढ़ से तेलंगाना-वैश्विक स्तर पर अश्वगंधा को ब्रांड बनाकर साबित किया है कि महिला उद्यमिता राजस्थान की माटी से ग्लोबल स्टेज तक पहुँच सकती है।
Media Kesari
Jaipur
जयपुर। "व्यापार शुरू करने के लिए धन या संसाधनों का अभाव केवल एक बहाना है। अगर आपकी नीयत साफ है, खुद पर भरोसा है और इरादा पक्का है, तो दुनिया की कोई ताकत आपको सफल होने से नहीं रोक सकती। संसाधन जुटाए जा सकते हैं, लेकिन जीतने का जुनून आपके भीतर से ही आना चाहिए।" यह ओजस्वी विचार सुप्रसिद्ध उद्योगपति और इक्सोरियल व कार्तिकेय ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज की चेयरपर्सन भगवती बल्दवा (Bhagwati Baldwa. CMD-Ixoreal & Shri Kartikeya Group of Industries) ने व्यक्त किए।
भगवती बल्दवा जेइसीआरसी यूनिवर्सिटी (JECRC University) के नेशनल सर्विस स्कीम (NSS) और जेइसीआरसी 90.8 एफएम द्वारा आयोजित मेगा मोटिवेशनल टॉक 'फ्रॉम डेजर्ट सैंड्स टू ग्लोबल स्टैंड्स' में मुख्य अतिथि के रूप में विद्यार्थियों को संबोधित कर रही थीं।
जड़ों से जुड़ाव: श्रीडूंगरगढ़ की गलियों से वैश्विक मंच तक
अपने संबोधन में भावुक होते हुए बल्दवा ने कहा कि राजस्थान केवल एक प्रदेश नहीं, बल्कि अदम्य साहस और संस्कारों की संस्कृति है।
उन्होंने श्रीडूंगरगढ़ में बीते अपने बचपन को याद करते हुए युवाओं को सीख दी कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, अपने परिवार, समाज और जड़ों को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि कैसे राजस्थान का पारंपरिक ज्ञान और यहाँ का अश्वगंधा आज 'इक्सोरियल' के माध्यम से वैश्विक पहचान बना रहा है, जिसकी सराहना प्रधानमंत्री मोदी ने भी 'मन की बात' में की है।
बदलता राजस्थान: खनिजों से सोलर स्टेट तक
बल्दवा ने कहा कि आज का राजस्थान बदल चुका है। यहाँ की तीखी धूप अब बाधा नहीं, बल्कि 'सोलर स्टेट' के रूप में देश की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। बाड़मेर-जैसलमेर के तेल भंडार और प्रदेश के खनिज (ज़िंक, तांबा, पोटाश) नई आर्थिक रीढ़ बन रहे हैं।
AI से डरें नहीं, इसे अपना साथी बनाएं: मुकेश सैनी
इंडिलिंक्स न्यूज़लैब के फाउंडर मुकेश सैनी ने डिजिटल क्रांति पर युवाओं का मार्गदर्शन किया। उन्होंने तकनीक के प्रति डर को दूर करते हुए कहा-
"आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रोजगार छीनने के लिए नहीं, बल्कि नए वैश्विक अवसर पैदा करने के लिए है। जो तकनीक को अपना साथी बनाएगा, वही भविष्य का लीडर कहलाएगा।"
सामाजिक सरोकार और संस्कार भी जरूरी
यूनिवर्सिटी के अधिकारियों ने भी युवाओं को सोशल मीडिया की आभासी दुनिया से बाहर निकलकर वास्तविक धरातल पर काम करने की सलाह दी-
धीमांत अग्रवाल (डायरेक्टर, डिजिटल स्ट्रेटेजीज) व एस.एल. अग्रवाल (रजिस्ट्रार) ने आयोजन की महत्ता बताते हुए उद्यमिता को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
डॉ. सोनू पारीक व पंडित अमनदीप ने स्पष्ट किया कि तकनीकी नवाचार के साथ मानवीय संवेदनाएं और महिला नेतृत्व का सम्मान करना अनिवार्य है।
सफलता के 'गोल्डन रूल्स' (प्रमुख बिंदु)
बड़ा सोचें, शुरुआत छोटी करें: सफलता के लिए किसी भी काम को कल पर न टालें, तुरंत निर्णय लें।
शॉर्टकट से बचें: धैर्य, अनुशासन और टीम वर्क ही शिखर तक पहुँचने का एकमात्र रास्ता है।
संस्कारों का साथ: जड़ों से जुड़ाव ही आपको विपरीत परिस्थितियों में टूटने से बचाता है।
परंपरा व विज्ञान: पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक रिसर्च के साथ जोड़कर ही ग्लोबल पहचान बनाई जा सकती है।




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