Giral Lignite Mines VIDEO: "मजदूरों से पहले मैं जान दूँगा...", विधायक रविंद्र भाटी ने खुद पर पेट्रोल छिड़क कर सरकार को ललकारा!

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गिरल लिग्नाइट माइंस विवाद:- 50 दिनों से भूखे श्रमिकों की अनदेखी पर फूटा गुस्सा; एसडीएम तक का न आना लोकतंत्र का अपमान या सरकार का अहंकार ?

श्रमिकों के हक के लिए शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने खुद पर छिड़का पेट्रोल; सरकार की चुप्पी पर व्यवस्था को हिला देने वाली चेतावनी

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बाड़मेर जिले के गिरल (शिव) में पिछले 14 दिनों से श्रमिकों के हक, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे शिव विधायक Ravindra Singh Bhati ने आज बाड़मेर कलेक्ट्रेट के बाहर लोकतंत्र को झकझोर देने वाला कदम उठाते हुए ख़ुद पर पेट्रोल छिड़क लिया।

Media Kesari, latest news today, बाड़मेर जिले के गिरल (शिव) में पिछले 14 दिनों से श्रमिकों के हक, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे शिव विधायक Ravindra Singh Bhati ने आज बाड़मेर कलेक्ट्रेट के बाहर लोकतंत्र को झकझोर देने वाला कदम उठाते हुए ख़ुद पर पेट्रोल छिड़क लिया।

प्रशासनिक संवेदनहीनता और सरकार (RSMML) की पूर्ण चुप्पी के खिलाफ भाटी का यह आक्रोश उस व्यवस्था पर सीधा प्रहार था, जिसने 14 दिनों से धरने पर बैठे एक जनप्रतिनिधि और 50 दिनों से धरने पे बैठे हजारों श्रमिकों की पीड़ा तक सुनना जरूरी नहीं समझा।

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धरनास्थल पर भावुक और आक्रोशित स्वर में विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि, “यह लोकतंत्र है या तानाशाही? एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि पिछले 15 दिनों से श्रमिकों के अधिकारों के लिए धरने पर बैठा है, लेकिन सरकार की ओर से एक एसडीएम स्तर का अधिकारी तक वार्ता के लिए नहीं आया। आखिर सरकार किस बात का इंतजार कर रही है?”

भाटी ने ख़ुद पर पेट्रोल छिड़कते हुए चेतावनी भरे शब्दों में कहा, “यदि श्रमिकों को मरने के लिए मजबूर किया जाएगा, तो उससे पहले मैं अपनी जान दे दूँगा, ताकि सत्ता में बैठे लोग जागें और उन्हें मजदूरों की चीखें सुनाई दें।”

गौरतलब है कि गिरल लिग्नाइट माइंस (Giral Lignite Mines) में श्रमिक शोषण, पर्यावरणीय अनियमितताओं और स्थानीय लोगों की अनदेखी को लेकर चल रहा आंदोलन अब जनआक्रोश का रूप ले चुका है। लगातार बढ़ते आंदोलन और सरकार की चुप्पी ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 

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