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शाकंभरी की चौखट पर सीएम: उपेक्षित सांभर को घोषणाओं के 'अमृत' की आस, यूनिवर्सिटी टाउनशिप और फिल्म सिटी पर नजर
चौहानों की राजधानी से फिल्म सिटी तक: शाकंभरी माता के दर पर भजनलाल शर्मा; क्या सांभर को मिलेगा 'मिनी मुंबई' का दर्जा?
Media Kesari
Jaipur
जयपुर/सांभर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (CM Bhajan Lal Sharma) सोमवार 23 मार्च, चैत्र शुक्ल पंचमी के दिन सांभर की समराय माता शाकंभर राजरानी के दर्शन करने आ रहे हैं।पूरा सांभर इलाका उत्सुक है कि मातेश्वरी के दर्शन व उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के उपरांत वे सांभर के लिए क्या महत्वपूर्ण घोषणा कर के जाते हैं। इस समय सांभर की उनसे पांच अपेक्षाएं हैं, जो उनके लिए संभव भी है, देखना है इन अपेक्षाओं को लेकर उनकी क्या सोच रहती है।
सांभर अंचल की पहली अपेक्षा जिला मुख्यालय का दर्जा है, जिसके लिए आजादी के समय से ही प्रतीक्षा चल रही है। उल्लेखनीय है कि आजादी के पहले ब्रिटिश राज और जयपुर व जोधपुर रियासत काल में सांभर दोनों स्टेट जयपुर और जोधपुर का जिला मुख्यालय था, लेकिन आजादी के बाद यह गौरव छिन गया। अनेक मुख्यमंत्री आये और चले गए लेकिन किसी ने भी सांभर को जिला बनाने की मांग का सम्मान नहीं किया। भजनलाल जी जिन शाकंभरी माता जी के दर्शन करने पधार रहे हैं, वह चौहान वंश की कुलदेवी थी और सन 550-1100 तक चौहान वंश शासनकाल के दौरान तो सांभर स्टेट थी और स्टेट मुख्यालय भी। बाद में यह मुख्यालय अजमेर चला गया। पर महत्वपूर्ण बात है सांभर का मान, अगर भजनलाल जी इस मांग का सम्मान करते हुए कोई आश्वासन देते हैं तो यह सांभर अंचल के लिए बड़ी बात होगी। हालांकि अभी जनगणना के कारण नये राजस्व जिलों की घोषणा व्यवहारिक व सैद्धांतिक तौर पर संभव नहीं, लेकिन जनगणना का काम पूरा होने के बाद सांभर जिला बने, यह आश्वासन देना मुख्यमंत्री के हाथ में है।
फिल्म डेस्टीनेशन: 100 से अधिक फिल्मों की शूटिंग का गवाह; 'जीरो फीस' और फिल्म सिटी के दर्जे की अपेक्षा
सांभर फिल्म शूटिंग का बड़ा डेस्टीनेशन बना हुआ है। राजस्थानी फिल्म राधू की लक्ष्मी से यहां फिल्म शूटिंग का सिलसिला 1994 से प्रारंभ हुआ था, अब तक एक सौ से अधिक फिल्मों, वेब सीरियल तथा शार्ट फिल्मों की यहां शूटिंग है चुकी है। विज्ञापन फिल्मों तथा प्री वेड शूटिंग का यह बड़ा डेस्टीनेशन है। एक तरह से सांभर बनी बनाई फिल्म सिटी है। इसके लिए दो काम करने हैं, एक सांभर को फिल्म सिटी का दर्जा मिले और दूसरे यहां फिल्म शूटिंग के लिए कोई शुल्क न लिया जाए। इससे न केवल यह डेस्टीनेशन प्रमोट होगा बल्कि मिनी मुंबई के तौर पर सांभर स्थापित हो सकेगा।
नमक के अंचल में विकास की लहर: केमिकल क्लस्टर और हाईटेक अस्पताल से बदल सकती है इलाके की तकदीर
प्रमुख आर्थिक विश्लेषक कैलाश शर्मा कहते हैं कि आजादी के पहले चौहान वंश शासकों, मुगल सल्तनत, रियासतों व ब्रिटिश शासन में सांभर रेवैन्यू का बड़ा स्रोत था, यहां का नमक उद्योग युगों युगों से इलाके की लाइफ लाइन रहा है। वह गौरव लौट सकता है, इलाके का इकोनोमिक ट्रांसफार्मेशन हो सकता है। वह तब संभव है जबकि तीन काम हों। पहला केंद्र सरकार ने बजट में यूनिवर्सिटी टाउनशिप घोषित की है, इसके लिए केंद्र सरकार से मुख्यमंत्री संपर्क करें तथा सांभर के लिए यूनिवर्सिटी टाउनशिप स्वीकृत करायें। दूसरे केंद्र सरकार ने ही बजट में केमिकल क्लस्टर घोषित किया है, केमिकल फार्मेशन के लिए नमक बहुत बड़ा घटक है। सरकारी कंपनी सांभर साल्ट परिसर में यह केमिकल क्लस्टर स्थापित किया जा सकता है। इसके लिए भी केंद्र सरकार से समन्वय व स्वीकृति की आवश्यकता है। तीसरी बात यह कि सांभर की आबो हवा बहुत सकारात्मक व स्वास्थ्य वर्धक है, केंद्र सरकार ने बजट में आयुर्वेद के राष्ट्रीय केंद्र एम्स के रूप में खोलने की घोषणा की है, इसके लिए केंद्र सरकार से समन्वय कर यह आयुर्वेदिक एम्स सांभर में लाया जा सकता है।
एक महत्वपूर्ण स्थानीय आवश्यकता भी है और वह यह कि सांभर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को क्रमोन्नत कर जिला स्तरीय दर्जा दिया जाये तथा यहां सभी प्रमुख बीमारियों का ऐसा तत्काल निदान हो कि चिकित्सक जयपुर रैफर न करें। खासकर हार्ट, न्यूरो व दुर्घटना मामलों में संपूर्ण चिकित्सा सेवा सांभर में ही उपलब्ध हो।



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