LTV का बिगड़ा गणित: गिरवी रखे सोने की वैल्यू घटी, NBFC कंपनियों पर बढ़ा डिफॉल्ट का खतरा
Media Kesari
Mumbai
मुंबई/नई दिल्ली -23 मार्च। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में आई 'गिरावट' ने घरेलू शेयर बाजार में गोल्ड लोन देने वाली नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज (NBFCs) की कमर तोड़ दी है।
सोमवार को दिग्गज गोल्ड लोन कंपनीज मुथूट (Muthoot Finance) और मणप्पुरम (Manappuram Finance) के शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई, जिससे ये स्टॉक्स 7% तक लुढ़क गए।
क्यों मची है खलबली? ये हैं 4 बड़े कारण
सोने की गिरती कीमतें और डॉलर का दम:
मजबूत अमेरिकी डॉलर और वैश्विक दबाव के कारण सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। चूंकि इन कंपनियों का पूरा कारोबार गिरवी रखे सोने पर टिका है, इसलिए गोल्ड वैल्यू घटते ही इनका कोलैटरल (जमानत) कमजोर हो गया है।
LTV Ratio का बिगड़ता गणित:
सोने के दाम गिरने से 'लोन टू वैल्यू' (LTV) अनुपात प्रभावित हुआ है। मान लीजिए, पहले 1 लाख के सोने पर 75 हजार का लोन था, अब उसी सोने की कीमत घटने से कंपनियों के पास सुरक्षा मार्जिन कम हो गया है। इससे डिफ़ॉल्ट का जोखिम बढ़ गया है।
US फेड के सख्त संकेत:
अमेरिकी केंद्रीय बैंक (US Fed) द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम होने और महंगाई के दबाव ने निवेशकों को डरा दिया है। वैश्विक अनिश्चितता के चलते निवेशकों ने मुनाफ़ा वसूली (Profit Booking) को प्राथमिकता दी।
नीलामी और वित्तीय घाटे का डर:
यदि सोने के दाम और गिरते हैं, तो कंपनियों को ग्राहकों से अतिरिक्त मार्जिन मांगना होगा। ग्राहक के पैसे न चुकाने की स्थिति में कंपनियों को कम दाम पर सोना बेचना (Auction) पड़ सकता है, जिससे सीधे तौर पर उनके मुनाफे और एसेट क्वालिटी पर चोट पहुंचेगी।
सोने की कीमतों में अस्थिरता जब तक बनी रहेगी, तब तक गोल्ड लोन स्टॉक्स में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को फिलहाल 'वेट एंड वॉच' की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
-मार्केट एक्सपर्ट्स की राय

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