JKK हुआ लोक संस्कृति की अनूठी छटा से सराबोर, लोकरंग दो दिन और...देखें खूबसूरत तस्वीरें

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- परवान चढ़ा उत्सव, देखने उमड़ रहे शहरवासी

- हस्तशिल्प मेला भी बना आकर्षण का केंद्र


Media Kesari

Jaipur

जयपुर: जवाहर कला केन्द्र (Jawahar Kala Kendra) की ओर से जारी 11 दिवसीय 26वां लोकरंग महोत्सव इन दिनों कला प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अपने परवान पर पहुंच रहे महोत्सव में विविधता में एकता की तस्वीर देखने को मिल रही है।  बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार के साथ हिस्सा ले रहे हैं। आगामी दो दिनों में लोकरंग के अंतर्गत होने वाले राष्ट्रीय लोक नृत्य उत्सव में खास प्रस्तुतियां देखने को मिलेगी। 

Media Kesari Jaipurजयपुर: जवाहर कला केन्द्र (Jawahar Kala Kendra) की ओर से जारी 11 दिवसीय 26वां लोकरंग महोत्सव इन दिनों कला प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अपने परवान पर पहुंच रहे महोत्सव में विविधता में एकता की तस्वीर देखने को मिल रही है।  बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार के साथ हिस्सा ले रहे हैं। आगामी दो दिनों में लोकरंग के अंतर्गत होने वाले राष्ट्रीय लोक नृत्य उत्सव में खास प्रस्तुतियां देखने को मिलेगी।


इसी के साथ शिल्पग्राम में लगने वाले राष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले में नेशनल और स्टेट अवॉर्डी हस्तशिल्पियों के उत्पाद खरीदने का भी सुनहरा अवसर है।

 सोमवार को लोकरंग के 9वें दिन शिल्पग्राम के मुख्य मंच पर भवाई, केरल के कोलकली, चकरी, गुजरात के गरबा, जम्मू-कश्मीर के बचनगमा, तेलंगाना के गुसाड़ी, चरी और पंजाब के जिन्दवा की प्रस्तुति हुई। 

सोमवार को लोकरंग में कुल 280 कलाकारों ने प्रस्तुति दी। मध्यवर्ती में 8 राज्यों की 11 प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोहा। कर्नाटक के ढोलू कुनीथा से राष्ट्रीय लोक नृत्य समारोह की जोशीली शुरूआत हुई।

सोमवार को लोकरंग के 9वें दिन शिल्पग्राम के मुख्य मंच पर भवाई, केरल के कोलकली, चकरी, गुजरात के गरबा, जम्मू-कश्मीर के बचनगमा, तेलंगाना के गुसाड़ी, चरी और पंजाब के जिन्दवा की प्रस्तुति हुई।   सोमवार को लोकरंग में कुल 280 कलाकारों ने प्रस्तुति दी। मध्यवर्ती में 8 राज्यों की 11 प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोहा। कर्नाटक के ढोलू कुनीथा से राष्ट्रीय लोक नृत्य समारोह की जोशीली शुरूआत हुई।

ढोलू कुनीथा

 गुजरात की टीपणी के बाद हिमाचल प्रदेश के सिरमौर नाटी की प्रस्तुति हुई।  सिरमौर एक जिला है व लोक भाषा में नाटी शब्द नृत्य का सूचक है। इस नाटी में प्रसन्नता जाहिर की जाती है। इसमें माला, मुंजरा, परात व रासा नृत्य की संयुक्त प्रस्तुति दी गयी।

गुजरात की टीपणी के बाद हिमाचल प्रदेश के सिरमौर नाटी की प्रस्तुति हुई।  सिरमौर एक जिला है व लोक भाषा में नाटी शब्द नृत्य का सूचक है। इस नाटी में प्रसन्नता जाहिर की जाती है। इसमें माला, मुंजरा, परात व रासा नृत्य की संयुक्त प्रस्तुति दी गयी।

सिरमौर नाटी

 त्रिपुरा की कलाकारों ने होजागिरी में नयी मुद्राओं के संयोजन से सभी का मनोरंजन किया। घूमर की प्रस्तुति में राजस्थानी की संस्कृति का वैभव झलका। तमिलनाडु के कड़घम कटकल और असम के बारदोई शिखला के बाद गुलाबो सपेरा की कालबेलिया नृत्य प्रस्तुति ने सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया।

लोकरंग की पूरी तस्वीरें देखने के लिए हमारी instagram profile पर visit करें --


 
कार्यक्रम की शुरुआत जितने जोश से हुई उतनी ही ऊर्जा के साथ इसका समापन हुआ। क्योंकि आंगिक अभिनय प्रधान झारखंड के पुरुलिया छऊ नृत्य की प्रस्तुति में महिषासुर मर्दनी के प्रसंग को साकार किया गया वहीं गुजरात के सिद्दी गोमा में अफ्रीकन जनजाति के कलाकारों ने रोमांचित करने वाले करतब दिखाए। 

देश की सांस्कृतिक विविधता से होगा साक्षात्कार - प्रियंका जोधावत 

जेकेके की अति. महानिदेशक प्रियंका जोधावत ने कहा कि लोकरंग महोत्सव न केवल लोक कला बल्कि भारत के विभिन्न हिस्सों की भाषा, पहनावा व रहन-सहन को करीब से जानने का बेहतर मौका है। देश की सांस्कृतिक विविधता से साक्षात्कार करवाने का प्रयास किया गया है। कई ऐसी विधाएं है जो पहली बार मंच पर आई है और 20 से अधिक ऐसी लोक विधाएं हैं जो गत वर्ष से भिन्न हैं। पुरुलिया छऊ में हर दिन नए प्रसंगों, सिद्दी गोमा में नित नए रोमांच और डेजर्ट सिम्फनी व डांस ऑफ फिनाले के साथ लोकरंग का समापन होगा।

मध्यवर्ती में होने वाले राष्ट्रीय लोक नृत्य समारोह में आगामी दो दिनों में दिलों में जगह बनाने वाली खास प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी। अपनी तान से मस्त करने वाले भपंग वादन, कृष्ण रंग में रंगने वाली ब्रज होरी, मणिपुर का हरि रिहा, बिहार के लोक नृत्य, रोमांच से भर देने वाले गुजरात के सिद्दी गोमा, रास, टीपणी, गरबा, उत्साह से भर देने वाले उत्तर प्रदेश का मयूर नृत्य, नृत्य के जरिए जोशीले अंदाज में विभिन्न प्रसंगों को दर्शाने वाला झारखंड का पुरुलिया छऊ, पश्चिमी राजस्थान के वाद्य यंत्रों की समाहित धुन डेजर्ट सिम्फनी में सुनने को मिलेगी। सबसे विशेष यह है कि अंतिम दिन डांस ऑफ फिनाले में सभी वाद्य यंत्रों का लयबद्ध वादन और देश से आई लोक नृत्य विधाओं का समागम मध्यवर्ती में देखने को मिलेगा। राष्ट्रीय लोक नृत्य समारोह का प्रतिदिन फेसबुक पर लाइव प्रसारण भी किया जा रहा है। 

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