Kairana Crime News
पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की हत्या ने एक बार फिर प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर खड़े किए गंभीर सवाल
✍️ गुलवेज़ आलम
स्वतंत्र पत्रकार, कैराना
Media Kesari
सीतापुर। महोली क्षेत्र के पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी हत्याकांड में६ वांछित दो मुख्य आरोपित गुरुवार सुबह पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में मुठभेड़ के दौरान मार दिए गए। दोनों आरोपितों की पहचान संजय तिवारी उर्फ अकील और राजू तिवारी उर्फ रिजवान के रूप में हुई है। दोनों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस ने इनके कब्जे से एक कार्बाइन और एक पिस्टल बरामद करने का दावा किया है। मुठभेड़ पिसावां थाना क्षेत्र अंतर्गत दूल्हापुर तिराहे के पास हुई।
पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल के अनुसार, गुरुवार सुबह एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की पांच टीमों द्वारा पिसावां क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पर घेराबंदी की गई थी। इसी दौरान बाइक सवार दो युवकों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में दोनों को गोली लगी। उन्हें तत्काल सीएचसी पिसावां ले जाया गया, जहां से जिला अस्पताल रेफर किया गया। उपचार के दौरान दोनों को मृत घोषित कर दिया गया।
मृतक संजय तिवारी और राजू तिवारी, मिश्रिख थाना क्षेत्र के अटवा गांव के निवासी थे और पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की हत्या के बाद से फरार चल रहे थे। पुलिस ने बताया कि दोनों के खिलाफ कई आपराधिक मुकदमे भी दर्ज हैं और इनकी तलाश में लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे। मामले में दोनों के ऊपर शासन द्वारा एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
उल्लेखनीय है कि 8 मार्च 2025 को महोली कस्बे में कार्यरत दैनिक जागरण के पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जब वे मोटरसाइकिल से सीतापुर-बरेली हाईवे होते हुए अपने घर लौट रहे थे। घटना हेमपुर रेलवे ओवरब्रिज के समीप घटी थी। उन्हें करीब चार गोलियां मारी गई थीं।
घटना के बाद प्रदेशभर में पत्रकार संगठनों ने विरोध जताया था और शासन-प्रशासन से आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी तथा पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग की थी। हत्या के करीब 34 दिन बाद 10 अप्रैल को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक चक्रेश मिश्र ने मामले का खुलासा करते हुए कथित तौर पर साजिशकर्ता पुजारी विकास राठौर उर्फ शिवानंद, निर्मल सिंह और असलम गाजी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसके बाद 20 मई को पुलिस द्वारा इस प्रकरण की विवेचना हेतु विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया।
अब जबकि दोनों शूटर मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं, पुलिस इसे बड़ी सफलता मान रही है। हालांकि पत्रकार संगठनों और जागरूक नागरिकों के बीच यह चर्चा भी है कि क्या इन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा दिलाना अधिक उचित न होता? क्या इस एनकाउंटर के जरिए असल साजिशकर्ताओं पर पर्दा डालने की कोशिश तो नहीं हुई? हत्या की पृष्ठभूमि, कारण और उसके पीछे की असल साजिशें अब भी पूरी तरह सामने नहीं आ सकीं हैं।
पत्रकार राघवेंद्र बाजपेयी की हत्या ने एक बार फिर प्रदेश में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
जहां एक ओर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे पत्रकारों को दिनदहाड़े मौत के घाट उतार रहे हैं, वहीं प्रशासनिक तंत्र की कार्रवाई और न्याय प्रक्रिया पर भी कई बार सवाल उठते रहे हैं। पत्रकार संगठनों ने इस मुठभेड़ की निष्पक्ष जांच, हत्या की पृष्ठभूमि का विस्तृत खुलासा और पत्रकारों की सुरक्षा हेतु ठोस कानून बनाने की मांग दोहराई है।

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