Rajasthan Transgender News: क्या 'ट्रांसजेंडर अधिकारों' का हनन कर रहे हैं नए संशोधन? नई भोर CBO ने खटखटाया अदालत का दरवाजा

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Pushpa Mai Transgender Rights Petition

ट्रांसजेंडर अधिनियम में संशोधनों के खिलाफ याचिका दायर

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जयपुर-21 अप्रैल,2026। ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों और उनकी गरिमा की रक्षा के लिए एक निर्णायक कदम उठाते हुए, नई भोर CBO की निदेशक और प्रख्यात कार्यकर्ता पुष्पा माई ने हाल ही में प्रस्तावित/लागू किए गए ट्रांसजेंडर अधिनियम (Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019) में संशोधनों को न्यायालय में चुनौती दी है।

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यह याचिका एडवोकेट मितुल जैन के माध्यम से प्रस्तुत की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि हालिया संशोधन ट्रांसजेंडर समुदाय के मौलिक अधिकारों, गरिमा और आत्म-पहचान के अधिकार को प्रभावित करते हैं।

याचिका में विशेष रूप से उन प्रावधानों पर आपत्ति जताई गई है जो पहचान प्रमाणन की प्रक्रिया को जटिल बनाते हैं, समुदाय की स्वायत्तता को सीमित करते हैं, तथा समानता और गैर-भेदभाव के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हैं। इसके अतिरिक्त, याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि ये संशोधन सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णय NALSA बनाम भारत संघ NALSA vs Union of India( 2014) की भावना के विपरीत हैं, जिसमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के आत्म-पहचान के अधिकार को मान्यता दी गई थी।

Pushpa Mai, media Kesari,यह याचिका केवल कानून के खिलाफ नहीं, बल्कि उस सोच के खिलाफ है जो ट्रांसजेंडर समुदाय की पहचान और अधिकारों को सीमित करना चाहती है। - पुष्पा माई, निदेशक (नई भोर CBO)
यह याचिका केवल कानून के खिलाफ नहीं, बल्कि उस सोच के खिलाफ है जो ट्रांसजेंडर समुदाय की पहचान और अधिकारों को सीमित करना चाहती है। - पुष्पा माई, निदेशक (नई भोर CBO)

Pushpa Mai ने आगे कहा:

हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कानून हमें सुरक्षा दे, न कि हमारे अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगाए।”

नई भोर CBO ने इस पहल को ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है और उम्मीद जताई है कि न्यायालय इस मुद्दे पर संवेदनशीलता और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप निर्णय देगा।

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