ImpersonationFraud : सोशल मीडिया से रेकी और व्हाट्सएप से ठगी; सरकारी और निजी कर्मचारियों के लिए साइबर क्राइम शाखा की इमरजेंसी चेतावनी
Curated By Media Kesari
जयपुर, 28 अप्रैल 2026: राजस्थान में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक बेहद खतरनाक तरीका अपनाया है। अब ये अपराधी आपके 'बॉस' या विभाग के 'बड़े अधिकारी' बनकर आपको चूना लगा सकते हैं। इसे देखते हुए राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने एक विशेष 'इम्पर्सोनेशन फ्रॉड' (पहचान चोरी) एडवाइजरी जारी की है।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) वी के सिंह के निर्देशानुसार, आमजन और सरकारी/निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। अपराधी अब अधिकारियों की फोटो (DP) का इस्तेमाल कर डिजिटल जाल बुन रहे हैं।
ऐसे बुनते हैं ठगी का जाल? (Modus Operandi)
उप महानिरीक्षक पुलिस (साइबर क्राइम) शांतनु कुमार सिंह के अनुसार, अपराधी किसी भी वारदात को अंजाम देने से पहले पूरी 'रेकी' करते हैं:
➡️विभागीय डेटा की चोरी: ठग आधिकारिक वेबसाइट्स से अधिकारियों के नाम और पद चुराते हैं।
➡️सोशल मीडिया पर नजर: LinkedIn और Facebook के जरिए यह पता लगाया जाता है कि कौन किसका जूनियर है और वर्तमान में कौन सा प्रोजेक्ट चल रहा है।
➡️WhatsApp ग्रुप में सेंध: अपराधी विभागीय WhatsApp ग्रुप्स से सदस्यों की सूची और मोबाइल नंबर चोरी कर लेते हैं।
आजकल के साइबर ठग केवल मैसेज तक सीमित नहीं हैं, वे आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहे हैं:
➡️फेक प्रोफाइल और 'मीटिंग' का बहाना: बड़े अधिकारी (डायरेक्टर, कमिश्नर या MD) की फोटो लगाकर नया WhatsApp अकाउंट बनाया जाता है। मैसेज आता है— "मैं मीटिंग में हूँ, कॉल नहीं उठा सकता, तुरंत इस नंबर पर कुछ गिफ्ट वाउचर्स या पैसे भेज दो।"
➡️AI डीपफेक वॉइस (Deepfake Voice): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए अपराधी आपके बॉस की आवाज की हूबहू नकल करते हैं, जिससे कर्मचारी को लगता है कि सच में अधिकारी ही बोल रहे हैं।
➡️स्पूफ़्ड ईमेल (Spoofed Emails): ये ईमेल बिल्कुल असली जैसे दिखते हैं, लेकिन इनमें डोमेन नेम (जैसे .com की जगह .in-com) में मामूली बदलाव होता है।
➡️मेडिकल इमरजेंसी का झांसा: किसी रिश्तेदार के अस्पताल में होने का झूठा डर दिखाकर तुरंत पैसों की मांग करना।
साइबर ठगों से बचने के लिए राजस्थान पुलिस ने ये दिशा-निर्देश दिए हैं:
Rajasthan Police Cyber Advisory
1. पुष्टि करें: यदि किसी नए नंबर से अधिकारी के नाम पर मैसेज आए, तो तुरंत उनके आधिकारिक नंबर पर कॉल करके वेरिफिकेशन करें।
2. DP पर भरोसा न करें: इंटरनेट से किसी की भी फोटो डाउनलोड करना आसान है। सिर्फ फोटो देखकर पैसे न भेजें।
3. 'इमरजेंसी' से न डरें: ठग आपको सोचने का समय नहीं देते। किसी भी वित्तीय लेनदेन से पहले शांत रहें और वरिष्ठों से चर्चा करें।
4. गोपनीयता बनाए रखें: अपना OTP, बैंक विवरण या निजी जानकारी कभी भी WhatsApp पर साझा न करें।
शिकायत कहाँ दर्ज करें?
यदि आपके साथ ऐसी कोई कोशिश होती है, तो तुरंत इन माध्यमों से संपर्क करें:
➡️साइबर हेल्पलाइन: 📞 1930
➡️साइबर हेल्पडेस्क: 📱 9256001930 / 9257510100
➡️ऑनलाइन रिपोर्ट: 🌐 www.cybercrime.gov.in
➡️स्थानीय पुलिस: अपने नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराएं।

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