हर्फ़-दर-हर्फ़ जैसे धड़कन हो। जाने कैसी किताब हो साहिब।। -- डॉ यासमीन मूमल का विशेष आलेख

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विश्व पुस्तक दिवस पर विशेष

  साहित्य रचनाकार से आगे चलता है..

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डॉ.यासमीन मूमल 


मेरठ-23 अप्रैल। किताबों के बिना साहित्य ख़ामोश और विचार गूँगे के गुड़ के समान होते हैं जिसका स्वाद गूंगा चखने के बाद भी व्यक्त नहीं कर पाता है। हमारे शास्त्रों ने शब्द को ब्रह्म की संज्ञा दी है अर्थात्त् शब्द स्वयं में इतने शक्तिशाली होते हैं कि हर बात,विचार भाव प्रस्तुत करने की क्षमता रखते हैं।

शब्द ब्रह्म हैं
कह देते हैं तथ्य
शालीनता से।

हमारी सबसे अच्छी दोस्त किताबें होती हैं अगर रटने की बजाय समझ कर पढ़ी जायें और पढ़ी गई किताबों के ज्ञान को गुना जाये तब।


 जब किताबी ज्ञान व अध्ययन जीवन के अनुभव की कसौटी पर कसकर रचनाओं का आकार लेता है तब वह मारक और मणि कांचन योग फलित कालजयी दस्तावेज़ बन जाता  है और तब समाज की दिशा और दशा में सुखद परिवर्तन देखने में आते हैं।
साहित्य समाज का बिम्ब, दर्पण होता है। तत्कालीन परिस्थितियों समाज में घटित घटनाओं से रचनाकार का सीधा सम्बंध होता है वो अपने समय के समाज से तनिक भी अछूता नहीं रह सकता। साहित्यकार, रचनाकार हर संवेदनशील मुद्दे से प्रभावित, संचालित,क्रियान्वित होता चलता है। सह्रदय होने के कारण स्वभावतः प्रगतिशील और समाज को जोड़ने का स्वप्न  उसकी आंखों में सजा रहता है।  वह अपनी लेखनी,फन कला का प्रयोग अपनी अंतिम सांस तक समाज हित में करता रहता है। समाजहित ही रचनाकार का पहला धर्म होता है बाक़ी बात उसके बाद होती हैं। आज मन है कह दूँ--

" उल्फ़त का तुम परचम लेकर।
   नफ़रत की दीवार गिराना।।
  ये जीवन कुछ और नहीं है।
   सांसों का है ताना बाना।।"


इकट्ठा होके जो अम्न-अमां की बात करते हैं।
मुहब्बत ही के साँचें में वो लगते हैं ढले सारे।।


   साहित्य रचनाकार से आगे चलता है..

अनगिनत रचनाएं लोग याद रखते गुनगुनाते मिसाल देते हैं जबकि उनके रचनाकार का नाम तक नहीं जानते अतः साहित्य साहित्यकार से आगे-आगे चलता है। इसलिए हमेशा कुछ महत्वपूर्ण और पसन्दीदा किताबे पास रखने में कोई हर्ज नहीं, किताबें भी एक साथी की भूमिका अदा करती हैं। किताबों में समस्त ज्ञान का भण्डार है,तो किताबों की सदा इज़्ज़त करो और सजा कर रखो अनमोल प्यारी चीज़ की तरह और समय समय पर पढ़ते रहो अपनी सुविधा रुचि आनुसार।

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लेखक परिचय:--


लेखिका एक जानी-मानी साहित्यकार, शायरा हैं। विभिन्न साहित्यिक सम्मानों से सम्मानित हो चुकी हैं।

आप राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय विभिन्न प्रतिष्ठित मंचो से काव्य पाठ कर चुकी हैं।
आपकी राष्ट्रीय,अंतराष्ट्रीय पत्र,पत्रिकाओं में 300 से अधिक रचनाएँ प्रकाशित हो चुकी हैं।
राष्ट्रीय ,अंतराष्ट्रीय संगोष्ठियों में 70 से अधिक शोध पत्र  प्रस्तुतिकरण , प्रकाशन हो चुका है।

आप निम्न विधाओं में लिखती हैं:--

 लेख ,समीक्षा,शोधपत्र , दोहा, चौपाई, क़ता, क्षणिका, हाइकु, ग़ज़ल , गीत, मुक्त-छंद, तुकांत।

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2 Comments

  1. यासमीन जी हृदय से आपको बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं 💐💐👏👏

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  2. A really good article on the book culture.

    Congratulations Dr Yashmeen Mumal for writing this inspiring article for book lovers.

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