" ये शब्द कहाँ से आये "

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जानिए रोचक बाल कहानी के ज़रिए 'शब्दों का सफर'


✍️

मीनाक्षी माथुर
जयपुर


" मम्मी ये शब्द किसने बनाये ", हाथ मे अपनी किताब लिए बड़ी ही मासूमियत से मिनी ने अपनी मम्मी से पूछा।
" क्यों भई , मेरी मिनी रानी आज, शब्दों से परेशान क्यों हैं जी " , मम्मी ने मिनी को पुचकारते हुए हंस कर पूछा।
" जिसने भी बनाये अच्छा नही किया ", मिनी गुस्से में मटकती हुई बोली।
" अरे ! क्यों बाबा ", मम्मी ने आश्चर्य से शक्ल बनाते हुए पूछा और फिर मुस्कुरा दी।
" और क्या ! नही बनाये होते तो किताबें भी तो नही होती ना और हमें पढ़ना भी नही पड़ता और मजे ही मजे होते ", मिनी चेहरे पर चिंता के भाव लाते हुए बोली।
" ओहो ! तो ये बात है ", ये कहते हुए मम्मी खिलखिलाकर हंस पड़ी और प्यार से मिनी का गाल चूम लिया।

" अरे ! मेरी लाडो रानी ये शब्द नही होते तो तू चॉकलेट ,आइसक्रीम बोलना कैसे सीखती ", सोफे पर बैठी दादी माँ भी खिलखिलाकर बोली।
" हाँ , ये तो है " गहराई से सोचते हुए मिनी बोली।
" फिर क्या होता दादी ?" मिनी ने उत्सुकता से पूछा।
" इधर आ मैं तुझे समझाऊं",
कहते हुए दादी ने बाहों में भरते हुए मिनी को अपनी गोदी में बिठा लिया और उसे समझाने लगी।
" हजारों साल पहले जब मानव का विकास हो रहा था तब आदमी बोलना नही जानता था वो इशारों में एक दूसरे से बात करते था , फिर धीरे धीरे उसने चिड़ियों , बन्दर , भालू , कुत्तों बिल्ली आदि जानवरो से मुँह से आवाज़ निकालना सीखा साथ ही उसने सीखा चित्र बनाकर अपनी बातें एक दूसरे को समझाना और उसने पत्थरों पर , दीवारों पर चित्र बनाना सीख लिया , लेकिन चित्र बनाने में बहुत देर लगती थी और हर जगह दीवार या पत्थर भी नही मिलता था तो ऐसे में जो बहुत बुद्धिमान होते थे ना उन्होंने वर्णों का यानि के एल्फाबेट का विकास करना शुरू किया जिनसे आपके शब्द बनने लगे , शब्दों से वाक्य यानि सेंटेंस बने , सेंटेंस से पैराग्राफ और पैराग्राफ से आपका पूरा चेप्टर बन गया , समझी मेरी लाडो ", दादी , मिनी के चेहरे को अपने हाथों से प्यार से हिलाते हुए बोली।
" अच्छा ! तो दादी , फिर तो एक ही भाषा होनी चाहिए ना , हमे तो हिंदी , इंग्लिश , संस्कृति , फ्रेंच पढ़नी पड़ती है और याद भी करनी पड़ती है , इनका एग्जाम भी देना पड़ता है ", मिनी परेशानी की मुद्रा बनाते हुए बोली।
" हा हा हा ", दादी जोर से हंसी ।
" ये जो मेरी छोटी सी मिनी का छोटा सा दिमाग दौड़ रहा है नाsss वो इस पढ़ाई के कारण ही तो दौड़ रहा है , वरना इतनी सारी बातें कहाँ से आती इस छोटे से दिमाग में ", दादी प्यार से समझाते हुए बोली।
" मैं तो छोटी सी हूँ लेकिन किताबें तो बड़ी बड़ी हैं ना ",
मिनी गुस्सा दिखाते हुए बोली।
"अच्छा सुन , देख ये दुनिया बहुत बड़ी है और सब जगह का एनवायरमेंट , कल्चर , नेचर सब अलग अलग होता है , कहीं पहाड़ ही पहाड़ होते हैं , बर्फ होती है , तेज ठंड होती है तो कहीं पर बड़े बड़े मैदान तो कहीं पर नदियां , हरियाली होती है अलग अलग जानवर ,पेड़ होते हैं तो ऐसे ही अलग अलग जगह पर अलग अलग भाषा का विकास हुआ, कहीं अंग्रेजी ,कहीं हिंदी , इतालवी ,फ्रंच , आदि।
" तो हमारे भारत में क्या इनसब भाषाओं का विकास हुआ ? मासूमियत से मिनी ने पूछा।
" नही मेरी लाडो , भारत में सबसे पहले संस्कृत आई फिर इस बीच कई भाषाएं विकसित हुई बहुत बाद में हिंदी आई फिर जब विदेशों से आक्रमणकारी आये उनके साथ वहां के लोग उनकी भाषा भी आई और उर्दू , फ़ारसी, आदि भाषाएं आईं फिर पुर्तगाली , फ्रांसीसी , अंग्रेज़ आये उनके साथ उनकी भाषाएं आईं , इनके अलावा भारत में भी अलग अलग जगहों पर अलग अलग क्षेत्रीय भाषाएँ विकसित हुईं जैसे आप सुनते  हो ना पंजाबी , गुजराती , आसामी , तमिल राजस्थानी आदि। " दादी समझती जा रही थी और मिनी एकटक मासूमियत से उन्हें ऐसे देख रही थी जैसे उसे सब समझ में आ रहा हो।
" हे भगवान ! एक शब्द बनने में इतना समय लगा और हमें एक दिन में पूरा चेप्टर याद करना पड़ता है ", भोले से गुस्से के साथ मिनी बोली और दादी व मम्मी जोर से ठहाका लगाकर हंसने लगी।

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