मज़दूरों की कौन सुनेगा मी लॉर्ड...??

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जनहित याचिका पर सुनवाई-- प्रवासी मजदूरों के लिए ट्रेन व बसें बढाई जाएं



फाइनल बहस 21 मई को


By Desk ✍🏻

जयपुर-15 मई। आज राजस्थान हाईकोर्ट में प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने की व्यवस्था पर पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था एवम एक जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।
याचिका पर बहस करते हुए अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी व टी एन शर्मा ने बहस करते हुए कहा कि प्रवासी मजदूरों की हालत खराब है सैंकडों किलोमीटर पैदल जा रहे हैं और रोजाना मजदूर एक्सीडेंट में मर रहे हैं सरकारों को परवाह नहीं है बहुत कम रेल चलाई जा रही है जबकि रेलवे की क्षमता रोजाना दो करोड़ लोगों को ले जाने की है जस्टिस सबीना ने कहा कोटा से छात्रोंं को भेजा गया है इस पर भंडारी ने कहा कि वे सब पैसे वाले थे उनकी व्यवस्था सरकार ने कर दी लेकिन  मजदूरों की कोई सुनवाई नहीं है।


एडिशनल सॉलिसिटर जनरल रस्तोगी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में  ऐसी याचिका खारिज कर दी गई है इसका जवाब देते हुए भंडारी ने कहा कि जो सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज की गईं हैं उसमे प्रवासियों को अपने घर जाने की अनुमति देने की मांग की गई थी जबकि हमारी याचिका में मजदूरों को घर भेजने की व्यवस्था सरकार करे तथा शेल्टर होम में रखे गए मजदूरों का रिकॉर्ड रखा जावे इसलिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला उनकी याचिका पर लागू नहीं होता।
महाधिवक्ता ने कहा कि उन्होंने जवाब पेश कर दिया है एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि उन्होंने भी कल जवाब पेश कर दिया है लेकिन न्यायालय की फाईल पर नहीं था इसलिए रजिस्ट्री से कहा कि फ़ाइल पर पेश करें तथा फाइनल बहस  21.05.020 को होगी मामले की सुनवाई न्यायाधीश सबीना व न्यायाधीश सी के सोनगरा की खंडपीठ में हुईं।

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