बोर्ड परीक्षा के आयोजन का निर्णय एक आत्मघाती कदम

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सरकार पहले सभी उपस्थित परीक्षार्थियों एवं शिक्षकों का बीमा करवाए !


राजकुमार इंद्रेश

लेखक एवं कवि ✍🏻
जयपुर


             "कोरोना" इस वैश्विक आपदा के दौर में जब हमारा  देश सबसे मुश्किल चरण से गुजर रहा है,  शेष रही बोर्ड की परीक्षाओं का आयोजन करवाना अत्यंत मूर्खतापूर्ण एवं आत्मघाती कदम है।
          विद्यार्थियों शिक्षकों और उसके बाद संपूर्ण राजस्थान की जनता को इस संक्रमण की आग में झोंके जाने के इस भ्रष्ट क्दम का विद्यार्थियों अभिभावकों शिक्षकों एवं शिक्षक संघों द्वारा विरोध न करना दु:शासन द्वारा कौरव सभा में द्रोपदी का चीर हरण करते समय भीष्म,द्रोण आदि बुद्धिजीवियों के मौन रहने के समान है।
इसकी कीमत प्राण देकर चुकानी होगी।

       मैं कुछ बिंदुओं द्वारा इस आयोजन की भयावहता स्पष्ट करना चाहता हूं:-



1. यदि एक परीक्षा केंद्र में विद्यार्थियों,शिक्षकों एवं अन्य स्टाफ को मिलाकर 200 व्यक्ति भी उपस्थित रहते हैं और दुर्भाग्यवश एक भी व्यक्ति कोरोना संक्रमित पाया जाता है तो शेष रहे 199 व्यक्ति और उनके परिवारों को कैसे क्वॉरेंटाइन करेंगे ?
क्या कर पाएंगे?

2. इस तथ्य को समझे कि अभी देश में 5000000 जांचें हुई है और तीन लाख व्यक्ति कोरोना संक्रमित मिले हैं यानि प्रति 17 व्यक्ति एक संक्रमण।
यानि परीक्षा केंद्रों में उपस्थित 200 व्यक्तियों मैं से संभावित संक्रमित व्यक्तियों की संख्या-12 (यह आंकड़ों के आधार पर एक अनुमान भर है)
जबकि हमारा प्रदेश राजस्थान देश के टॉप-5 कोरोना संक्रमित प्रदेशों में से एक है।
कहीं यह परीक्षा प्रदेश में कोरोना संक्रमण के विस्फोट का कारण तो नहीं बनेगी।

3. जब P P E किट पहने और अन्य सारे बचाव के अपनाने के बाद भी डॉक्टर स्वयं संक्रमित हो रहें हैं तो परीक्षा केंद्र के आधे- अधूरे उपायों से क्या संक्रमण रोका जा सकता है?

4. छात्र और अध्यापक परीक्षा के उपरांत अपने घर जाएंगे ही। तो यदि इस परीक्षा के समाप्ति के 5 या 10 दिन बाद उनमें से किसी के संक्रमित होने की जानकारी सामने आती है तो आप किस-किसको आइसोलेट करेंगे ? क्या आप कर पाएंगे?

5. यदि हम सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाओं का उदाहरण दे तो निश्चित मानिए महाराष्ट्र,गुजरात, दिल्ली,और तमिलनाडु  सरकारें कभी भी अपने प्रदेश में इस आयोजन की अनुमति नहीं देगी।

6.विद्यार्थियों के लगभग 80% विषयों की परीक्षा हो चुकी है तो इन विषयों के प्राप्त अंकों के आधार पर शेष रहे विषयों के अंक नहीं दिए जा सकते?
"कई बुद्धिजीवी यह कह रहे हैं कि यदि कोई विद्यार्थी गणित में होशियार है तो उससे हिंदी के प्राप्त अंकों के आधार पर गणित में अंक दिया जाना न्यायोचित नहीं है"
तो मैं उनसे यह कहना चाहता हूं होशियार विद्यार्थी सभी विषयों में होशियार होता है गत वर्षों के परीक्षा परिणामों का आकलन करें तो देखेंगे की गणित में 98 अंक पाने वाले विद्यार्थियों में हिंदी जैसे व्याख्यात्मक विषय तक में 100 अंक (शत प्रतिशत) प्राप्त किए थे।
और फिर भी इन बुद्धिजीवियों की बात ही सही माने तो क्या यह कुल प्राप्त अंकों में हल्का सा उन्नीस-बीस होना क्या उस विद्यार्थी की जान से बढ़कर है।

7. यदि फिर भी यह बुद्धिजीवी ना माने तो इसका एक निरपेक्ष तरीका यह भी है कि विद्यार्थियों ने सत्र पर्यंत इंटरनल एग्जाम में जो अंक प्राप्त किए हैं उस आधार पर अंक दिए जा सकते हैं।
8. IIT  परीक्षा आयोजनों हेतु योग्यता का निर्धारण इस परिस्थिति को देखकर परिवर्तित किया जा सकता है।

9. फिर भी यदि सरकार और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यह परीक्षा करवाने पर आमादा है तो सभी उपस्थित परीक्षार्थियों एवं शिक्षकों का बीमा सरकार करवाएं और माननीय अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षा बोर्ड,  प्रमुख शासन सचिव,स्कूल शिक्षा और माननीय निदेशक माध्यमिक शिक्षा राजस्थान यह लिखकर दें यदि इस परीक्षा आयोजन के कारण कोई संक्रमण होता है तो यह इनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी और उसका संपूर्ण पुनर्भरण यह लोग व्यक्तिगत रूप से करेंगे।

10.यह बात भी सोचनीय है कि जब इन विषयों के पेपर थानों में सुरक्षित पड़े हैं तो नए प्रश्न पत्रों का मुद्रण क्यों करवाया जा रहा है।

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