पत्रकारिता का लबादा ओढ़कर घूमने वालों की अब खैर नहीं ! -- Weed out 'FAKE JOURNALISTS' !

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उच्चाधिकारी की इजाजत के बिना पुलिस वाले नही दे सकेंगे फर्जी पत्रकारों को इंटरव्यू



पत्रकार महेश झालानी की कलम से ✍🏻



प्रदेश में ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है जो पत्रकार के नाम पर लोगो को धमकाकर ब्लैकमेल करने का कारोबार कर रहे हैं । इसके अलावा किसी भी पुलिसकर्मी को इंटरव्यू देने से पूर्व अपने उच्च अधिकारी से इजाजत लेनी होगी । इसकी पालना नही करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है ।

राजस्थान में ही नही, पूरे प्रदेश में ऐसे लोगों की बाढ़ आ गई है जिनका किसी अखबार, मीडिया अथवा चैनल से कोई सरोकार नही है ।  फिर भी वे फख्र से अपने को पत्रकार कहते है । इन स्वयंघोषित पत्रकारों के कारण वास्तविक पत्रकार मुख्यधारा से परे हटते जा रहे है । ऐसे फर्जी पत्रकारों की बारीकी से पड़ताल कर उनकी कुंडली को टटोला जाएगा ।




ऐसे ही लोगो की बढ़ती बाढ़ और फर्जी पत्रकार संगठन के नाम पर दुकान चलाने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने के लिए मैंने अति. मुख्य सचिव राजीव स्वरूप सहित पुलिस के आला अफसरों को पत्र लिखा था । राज्य सरकार और पुलिस में उच्च स्तर पर कार्रवाई होने की खबर मिली है ।



पत्र में कहा गया था कि इन दिनों राजस्थान में पत्रकारिता का लबादा ओढ़कर अनेक असामाजिक तत्व आपराधिक कार्यो को अंजाम दे रहे है । जानकारी में आया है कि अनेक शराब विक्रेता "प्रेस" के फर्जी पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर पुलिस एवं आबकारी विभाग वालो पर रौब गांठने में सक्रिय है । पत्र में कहा गया है कि ओला, उबर तथा कई वाहन चालक भी फर्जी पहचान पत्र लिए घूम रहे हैं। इसके अलावा अनगिनत वाहनों पर प्रेस अंकित है । जबकि इनका दूर दूर से भी पत्रकारिता से वास्ता नही है ।

दरअसल कई पुलिस अधिकारी ऐसे असामाजिक तत्वों को प्रश्रय दे रहे है । पब्लिसिटी इन अधिकारियों की खुराक है । कैमरे को देखते ही इंटरव्यू देने के लिए नीतलो की तरह बेहद उतावले हो जाते है । यह भी जानने की कोशिश नही करते है कि इंटरव्यू लेने वाला व्यक्ति असल मे है कौन और इंटरव्यू प्रसारित कहाँ होगा । आजकल हजार रुपये के कैमरे छाप सैकड़ो फर्जी पत्रकार प्रदेश में सक्रिय है ।  पत्र में आग्रह किया गया है कि निर्देश जारी करे कि प्रेस के वाहनों की सबसे पहले बारीकी से पड़ताल की जाए । जायज को परेशान नही किया जाए और नाजायज के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए ।

राजीव स्वरूप से गुजारिश की गई है कि पुलिस महानिदेशक को निर्देश जारी करे कि बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति लिए बिना कोई भी अफसर (विशेषकर थाने का स्टाफ) किसी भी मीडियाकर्मी, पत्रकार यूनियन या संगठन के पदाधिकारी की पूरी पड़ताल किये बिना इंटरव्यू या बाइट आदि नही दे । क्योकि सारा भ्रष्टाचार थाना स्तर पर ही पनपता है । यदि कोई अधिकारी ऐसा करता है तो उसके खिलाफ 16 सी सी ए के अंतर्गत कार्रवाई की जाए । इससे पत्ररकारिता का लबादा ओढ़कर फर्जीवाड़ा करने वाले के चेहरे से नकाब उतरकर रह जायेगा ।

पुलिस विभाग के महानिदेशक (अपराध) बीएल सोनी के निर्देश पर मेरे पत्र में वर्णित तथ्यों के आधार पर तथ्यात्मक रिपोर्ट भेजने का निर्देश प्रदान किया गया है । पत्र सभी आईजी, जयपुर व जोधपुर के आयुक्त सहित प्रदेश के सभी पुलिस अधीक्षकों को भेजा गया है ।


नोट : मेरा इरादा किसी पत्रकार, मीडियाकर्मी या ऐसे किसी व्यक्ति को आहत करने का नही है जो पत्रकारिता के प्रति समर्पित है । पत्रकारो की आवाज उठाने वाली यूनियन अथवा संगठन भी मेरा टारगेट नही है । टारगेट है तो वे लोग जो पत्रकारिता की आड़ में अवैध और नाजायज कार्य करते है । उम्मीद करता हूँ कि मेरी इस मुहिम में आप मेरा अवश्य साथ देंगे ।

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