मुख्यमंत्री गहलोत के हर जन्मदिन पर उनको खून से तोलने वाले विधायक सोलंकी आखिर क्यों हुए उनसे दूर? आईये जानें वो चार वजह !

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गहलोत की नजरअंदाजी ने सोलंकी को पायलट के क़रीब जाने पर किया मज़बूर




चाकसू / फकरुद्दीन खान



        जिस नेता ने राजनीति का एबीसीडी सिखाया,आगे बढ़ाया उस राजनीति के वटवृक्ष की छत्रछाया में एक नन्हा सा पौधा बड़ा पनपा और अचानक उसे छोड़ कर जाना इतना आसान भी नही था, जितनी आसानी बाहर से नजर आ रही है। कहीं न कही तो कोई जख्म ऐसा होगा, जिसकी पीड़ा से अपने पालक को छोड़ना पड़े।



     
 हम बात कर रहे है चाकसू विधायक वेदप्रकाश सोलंकी की। सोलंकी जब एनएसयूसआई में अपनी राजनीति का कखग.. सीख रहे थे, तब से लेकर विधायक बनने तक अपने रहनुमा अशोक गहलोत की छत्रछाया में रहे, फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि गहलोत के हर जन्मदिन पर पिछले 25 सालो से उनको खून से तोलने वाले सोलंकी आज उनसे दूर हो गए। कही न कही कोई कारण तो रहा होगा, वरना ऐसे ही कोई बेवफा नही हो जाता।


        कुछ कारण जो समझ मे आते है, उनका यहां जिक्र जरूरी है। यह सब चाकसू क्षेत्र की आम जनता से जुड़े है;

1. ग्रीन एयरपोर्ट का मामला:


         ग्रीन एयरपोर्ट के लिये शिवदासपुरा क्षेत्र की अवाप्त की गई जमीन जिससे चाकसू विधानसभा के लोग बड़ी संख्या में प्रभावित है, इस मसले पर बड़ी संख्या में आमजन के साथ विधायक सोलंकी प्रदेश के मुखिया अशोक गहलोत से कई बार मिले और पीडा जाहिर की, लेकिन गहलोत साहब ने इस मसले पर कोई प्रभावी कदम नही उठाया और सोलंकी का अपने राजनीतिक रहनुमा से दूर होने का यह पहला और बड़ा प्रभावी कारण दिखाई देता है।


2. रेनवाल मांझी में हाउसिंग बोर्ड का मसला


        हाउसिंग बोर्ड द्वारा रेनवाल मांझी क्षेत्र में अवाप्त की गई वह जमीन जहाँ रेनवाल मांझी के निवासी एवं अन्य लोग वहां रह रहे है। अपने आशियाने बना कर यहां स्कूल, अस्पताल, मन्दिर, मस्जिद एवं लोगो के कड़ी मेहनत के पेसो से बने आशियाने हाउसिंग बोर्ड को दिखाई नही दे रहे। ऐसी जमीन को अवाप्त कर हाउसिंग बोर्ड अपना काम शुरू करना चाहता है। क्षेत्र की जनता को प्रभावित करने वाला यह मसला भी सोलंकी एवं गहलोत की दूरियां बनाने में बहुत बड़ी कड़ी नजर आ रही है।

         यहां रहने वाली जनता के साथ चाकसू विधायक मुख्यमंत्री गहलोत से कई बार मिले ज्ञापन दिए, लेकिन वहाँ पर हाउसिंग बोर्ड ने जमीन अवाप्त करके अपनी योजना के लिये रोड बनाना शुरू कर दिए जिससे से क्षेत्र की जनता में चाकसू विधायक सोलंकी की वह छवि जो मुख्यमंत्री से हाथ पकड़ कर काम करवाने वाली बनी हुई थी, वह प्रभावित होने से चाकसू विधायक मुख्यमंत्री गहलोत से दूर होने लगे और गुरु चेले में दरार बढ़ने लगी।

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3. रेनवाल मांझी में बीसलपुर के पानी की मांग


        अभी कुछ दिनों पहले ही रेनवाल मांझी में स्थानीय आमजनता ने बीसलपुर लाइन से जयपुर को पानी देने वाली लाइन जो रेनवाल होकर आ रही है, वहां बड़ी संख्या में पहुँचकर धरना प्रदर्शन किया एवं मोके पर पहुचे चाकसू विधायक सोलंकी ने घोषणा की थी कि इस लाइन से जाने वाले पानी पर स्थानीय रेनवाल के लोगो का भी हक़ है और यह पानी इनको भी मिलना चाहिये।


        इस मसले पर भी मुख्यमंत्री एवं जलदाय विभाग के अधिकारियों ने चाकसू विधायक को नजरअंदाज करके स्थानीय जनता में विधायक सोलंकी की छवि को धूमिल करने का काम किया जिसके चलते सोलंकी गहलोत खेमे से निकलकर पायलेट खेमे में पहुचने को मजबूर हो गए।

4.बैकलॉग भर्ती का मामला


         चाकसू रिजर्व सीट है और sc, st के लोग बड़ी संख्या में रहते है। स्वयं सोलंकी भी दलित वर्ग की रहनुमाई करते है। ऐसे में अपने क्षेत्र के sc. st के अधिकारी, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं के मसले उठाते रहे है और मुख्यमंत्री ने बेकलॉग भर्ती प्रकिया चालू की तो सोलंकी ने चाकसू से लेकर जयपुर तक मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री के बड़े बड़े कटआउट लगाकर उनका आभार प्रकट किया। लेकिन वर्तमान में sc.st के डॉक्टरों एवं अधिकारियों को मुख्यमंत्री से मिलकर उनको प्रमोशन करवाने पहुचे सोलंकी एवं बस्सी विधायक लक्ष्मण मीणा को निराशा ही हाथ लगी और मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने सबसे विश्वनीय विधायक एवं अपने खास शिष्य को अपने से दूर कर दिया।

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