लैंगिक अस्मिता, भाषा व नई तकनीकी शब्दावली : चुनौतियाँ व संभावनाएं विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित

देखा गया

संपूर्ण देश के कुल 626 प्रतिभागियों ने दर्ज़ कराई सहभागिता



मीडिया केसरी न्यूज़ ✍🏻



 जयपुर-- 30 जुलाई। मानव संसाधन विकास मंत्रालय का वैज्ञानिक व तकनीकी शब्दावली आयोग ,भारत सरकार डायलॉग फॉर एकेडमिक जस्टिस और राजस्थान विश्वविद्यालय के सहयोग से 'लैंगिक अस्मिता, भाषा व नई तकनीकी शब्दावली- चुनौतियाँ व  संभावनाएं'  विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया।

इस वेब गोष्ठी में संपूर्ण देश के कुल 626 प्रतिभागियों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई।


वेब गोष्ठी की संयोजक राजस्थान विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर सुमन मौर्य ने बताया कि वर्तमान कोरॉना काल में महिलाओं पर अत्याचार आंकड़ों में निरंतर वृद्धि हुई है जिसके कारण लैंगिक अस्मिता पर विचार गोष्ठी का आयोजन वर्तमान समय की आवश्यकता है।
 कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो.जे.पी.यादव  कुलपति राजस्थान विश्वविद्यालय ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि कोविड काल में शैक्षणिक स्तर पर इस तरह के वेबीनार छात्रों ,शोधकर्ताओं, शिक्षकों के लिए बहुत उपयोगी व सार्थक सिद्ध हो सकते हैं। लैंगिक अस्मिता का विषय बहुत ही प्रासंगिक विषय है।



प्रो अवनीश कुमार अध्यक्ष मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार ने अपने उद्बोधन में वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग की समस्त जानकारियों से अवगत करवाया। पूर्व राज्यसभा सांसद व योजना योजना आयोग सदस्य तथा महाराष्ट्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर भालचंद्र मुंगेकर ने अपने उद्बोधन में बताया कि लैंगिक असमानता के चलते अस्मिता और सामाजिक सम्मान से जुड़े सरोकार के संघर्ष में महिलाएं आज भी स्वयं को अकेला पाती हैं ऐसे में समाज और परिवार को लैंगिक समानता की बुनियाद बनना चाहिए। राजस्थान विश्वविद्यालय की राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष राका सिंह ने अपने उद्बोधन में बताया कि महिलाओं की स्थिति पर व्यवहारिक आधार पर विवेचना की आवश्यकता है। समापन सत्र की मुख्य वक्ता प्रसिद्ध लेखिका व दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो. अल्पना मिश्रा ने बताया कि लैंगिक अस्मिता का भाव मानवीय मूल्य से जुड़ा है और वह सामाजिक पारिवारिक व्यवस्था की दशा व दिशा निर्धारित करता है।


 प्रो करोरी सिंह  ,एमेरिटस , ने अपने उद्बोधन में मनोविज्ञान में भाषा के अंतर्गत ही महिलाओं में असमानता प्रतिबिंबित होती हैं। राज्य समन्वयक, महिला अधिकारिता राजस्थान सरकार से डॉक्टर जगदीश प्रसाद ने केंद्र व राज्य से संबंधित महिला सशक्तिकरण की योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन ही वास्तविक रूप में महिला सशक्तिकरण है।
सीएसटीटी, एमएचआरडी कर्मचारी डॉ जय सिंह रावत  वैज्ञानिक अधिकारी और  डॉ शहजाद अंसारी वैज्ञानिक अधिकारी भी शामिल हुए।



वेबिनार के प्रथम दिन डॉ दिनेश गहलोत, डॉ सीताराम चौधरी, डॉ हरिराम परिहार, डॉ बालूदान बारहट, डॉ राकेश कुमार (जम्मू विश्वविद्यालय) संसाधन व्यक्ति के रूप में शामिल रहे। इसकी अध्यक्षता प्रोफेसर अवनीश कुमार ने की। 

दूसरे दिन रिसोर्स पर्सन के रूप में  डॉ लता, डॉ सुरेंद्र कुमार, डॉ मनोज मल्हार, डॉ राजेश सिंह, डॉ राहुल चौधरी उपस्थित रहे। इस तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ रवि राजवंशी ने की।
डॉ कानाराम ने धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया।


डॉ सुमन मौर्य  समन्वयक- राजस्थान, डीएफएजे और  डॉ  भगवंसिंग डोभाल , समन्वयक- मध्य भारत, उत्तर भारत ने डॉ लता के सहयोग से राष्ट्रीय सह-संयोजक, DFAJ, ने दो दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार की योजना, निष्पादन और तार्किक निष्कर्ष से कठिन परिश्रम किया। 

 डॉ रवि राजवंशी  (असम विश्वविद्यालय- समन्वयक- उत्तर पूर्व, डीएफएजे),  डॉ।  राकेश कुमार  (जम्मू और समन्वयक विश्वविद्यालय- जम्मू और कश्मीर, डीएफएजे) और  जितेन्द्र सिंह , समन्वयक- आईटी सेल, डीएफएजे भी शामिल रहे।

Post a comment

0 Comments