निराश्रित बच्चों की बुनियादी ज़रूरतें पूरी करने के साथ-साथ उनमें शिक्षा की अलख भी जगा रहा है FXBIS NGO

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 कंप्यूटर डिजिटल एजुकेशन के लिए निःशुल्क कक्षाएं संचालित कर रहा है FXBIS NGO


 FXBIS NGO द्वारा  लॉक डाउन के दौरान किया  गया COVID-19 प्रतिक्रिया कार्य





मीडिया केसरी वेबडेस्क ✍🏻




जयपुर-  सड़कों व रेलवे स्टेशन पर घूमने व रहने वाले अनाथ व बेसहारा बच्चों का  FXBIS NGO सहारा बना हुआ है।


  अक्सर देखने में आता है कि बेघर, बेसहारा व आर्थिक दृष्टि से कमज़ोर ये बच्चे अपना पेट पालने के लिए  सड़क पर घूमते हैं या फिर रेलवे स्टेशन पर भिक्षावृत्ति के लिए मजबूर हो जाते हैं।


FXBIS-जयपुर में 2007 से जयपुर रेलवे स्टेशन पर रह रहे बच्चों के साथ काम कर रहा है और रेलवे स्टेशन के आसपास के परिसर में रहने वाले बच्चों के लिए एक डे केयर सेंटर भी चला रहा है, डे केयर सेंटर चलाने का मुख्य उद्देश्य स्टेशन पर रहने वाले बच्चों को विभिन्न गतिविधियों जैसे एनएफसी कक्षाएं ट्यूशन कक्षाएं मनोसामाजिक समर्थन भोजन सहायता स्वास्थ्य की स्थिति कला और शिल्प कक्षाओं में सुधार करके सुरक्षित स्थान प्रदान करना है इसके अलावा ऐसे परिवार जो आर्थिक रुप से संपन्न नहीं है उनके बच्चों को कंप्यूटर प्रोग्राम में शामिल किया जाता है।



आपको बता दें कि FXB India Suraksha (FXBIS) जो एक भारतीय गैर सरकारी गैर लाभकारी संगठन है, ग्रामीण और शहरी भारत में रहने वाले ऐसे ज़रूरतमंद बच्चों महिलाओं और समुदायों को विकास सहायता प्रदान करती है 2007 कंपनी अधिनियम 2013 के तहत धारा 8 कंपनी के रूप में पंजीकृत किया गया है. जिसका उद्देश्य सुरक्षित स्वस्थ और उत्पादक वातावरण बनाकर लोगों को सम्मान पूर्ण जिंदगी के लिए तैयार करना है।



 संस्था की प्रॉजेक्ट ऑफिसर अनिता दयाल ने बताया कि कोविड- 19 की विश्वव्यापी महामारी की स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने अचानक लॉकडाउन की घोषणा कर दी जिसके लिए लोग तैयार नहीं थे। बहुत से प्रवासी लोग दिहाड़ी मजदूर वंचित परिवारों को इस तरह की परेशानी की स्थिति का सामना करना पड़ा। लॉकडाउन के कारण भोजन जैसी बुनियादी ज़रूरतों और अन्य आवश्यक ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं थे और सबसे कमजोर समूह हमारे नियमित लाभार्थी हैं जो रेलवे स्टेशन हसनपुरा पुलिया सड़क व आसपास के परिसर में रहते हैं और ज्यादातर काम के लिए रेलवे स्टेशन पर निर्भर है जिसमें बच्चे भी हैं जो संस्था के नियमित लाभार्थी है और सेंटर में शिक्षा भोजन व मनोसामाजिक समर्थन आदि की सुविधाएँ प्राप्त करते हैं लेकिन लॉकडाउन के कारण उन्हें बहुत परेशानी का सामना करना पड़ा। इस स्थिति में FXBIS संस्था द्वारा Devnext foundation ओर कुछ इंडिविजुअल डोनर कम्युनिटी वेलविशर समाजसेवी  के साथ मिलकर निम्न  सुविधाएँ प्राप्त कराने का प्रयत्न किया गया-




1.भोजन संबंधी सहयोग :  मार्च से लेकर अब तक संस्था ने लगभग 300 परिवारों( रेलवे स्टेशन जयपुर हसनपुरा फूस का  बंगला में सूखा राशन किट वितरित किया व् मई से अभी तक जो बच्चे सड़क पर रह रहे  है  रेलवे स्टेशन परिसर में  उनके लिए रोजाना  कुक्ड फ़ूड वितरित किया जा रहा है और साथ ही जो बच्चे स्लम में रह रहे है उन्हें सूखा नाश्ता (पोहा, दलिया , पास्ता  किट वितरित की जा रही है हर महीने।  साथ ही  ० से २ साल तक के बच्चो के लिए सूखा दूध ड्राई मिल्क भी हर महीने  दिया जा रहा है।


2. ऑनलाइन शिक्षा में सहयोग - संस्था बच्चो व् स्कूल के बीच में एक पुल की तरह काम कर रही है। बच्चो के पास फ़ोन सुविधा न होने के कारण बच्चे स्कूल द्वारा बनाये गए  व्हाट्सअप ग्रुप से नहीं जुड़ सकते थे ऐसे में संस्था ने खुद को स्कूल में बच्चो के गार्डियन के रूप में जोड़ा, जैसा की संस्था पहले से ही नॉन फॉर्मल एजुकेशन और सपोर्ट कक्षाएं इन बच्चो के लिए चलाती है। और फीलड में जाकर टेबलेट के द्वारा उनके स्कूल के कार्य में सहायता व् कक्षाएं दी जा रही है। 

       



3. सेनेटरी पैड वितरण - स्कूल अर्बन आंगनवाड़ी बंद होने के कारण लड़कियों को सेनेटरी पैड नहीं मिल पा रहे थे ऐसी स्थिति में संस्था ने लगभग 600 सेनेटरी पैड हसनपुरा रेलवे स्टेशन हसनपुरा फूस का  बंगला  में वितरित किए । और इसे हर महीने लड़कियों को उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है।


4.डिजिटल शिक्षा (कंप्यूटर) -लॉकडाउन के दौरान यह देखा गया है कि ज्यादातर चीज़े ऑनलाइन हो गई है चाहे वह पढ़ाई हो या अन्य कोई काम उसके लिए कंप्यूटर डिजिटल एजुकेशन बहुत आवश्यक है संस्था पहले से ही ऐसे  बच्चों के लिए जो  आर्थिक रुप से संपन्न नहीं फ्री कंप्यूटर क्लास चला रही है जो स्लम में रहते हैं, इसी सोच के साथ संस्था ने पहल की वह कम्युनिटी जाकर डिजिटल एजुकेशन  कैसे (कंप्यूटर का काम फ़ोन से करें इनकी क्लासेस शुरू की गई और अभी हमारा यह कार्यक्रम सूतमिल कम्युनिटी में लगभग 12 लड़कियों के साथ चल रहा है। जिसमे हम टेबलेट का प्रयोग कर रहे हैं।

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