जिन्होंने एमफिल की डिग्री प्राप्त कर ली है उन्हें भी पीएचडी के समकक्ष दर्जा प्राप्त हो: सुमन मौर्य

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संदर्भ:- नई शिक्षा नीति 2020



कोई भी कानून भविष्यलक्षी होना चाहिए, भूतलक्षी नहीं



सुमन मौर्य ✍🏻
सहायक प्रोफेसर
एवं अतिरिक्त डीन छात्र कल्याण
 राजस्थान विश्वविद्यालय




जयपुर--12 सितंबर। देश की नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद अब फिर शोधार्थियों की मेहनत से अर्जित एम फिल  की डिग्री की मान्यता को समाप्त कर दिया गया है। एम फिल का कोर्स नई शिक्षा नीति में निरस्त कर दिया गया है। मेरा देश के बुद्धिजीवीयों व शिक्षाविदों से अनुरोध है कि इस पर अपना विचार निष्पक्ष रुप से बिना किसी राजनीतिक पूर्वाग्रह के रखें। कहीं यह शिक्षा नीति विद्यार्थियों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ तो साबित नहीं हो रही। एक डिग्री कोर्स जिसमें कि विद्यार्थी शोध -प्रबंध व पेपर्स की परीक्षा देता है ,उसकी मान्यता ही समाप्त कर दिया जाना? यह क्या उचित है?


कहा यह जा रहा है कि इससे विद्यार्थी सीधे पीएचडी में प्रवेश ले सकेगा, किंतु पी एच डी में प्रवेश की सीमित सीटें होने के कारण कई विद्यार्थी पीएचडी से वंचित रह जाते हैं उन स्थितियों में इन विद्यार्थियों ने एमफिल की डिग्री प्राप्त कर ली है जिसमें उनका शोध प्रबंध पीएचडी के समकक्ष ही जांच हेतु परीक्षकों के पास जाता है और उस आधार पर उसका मूल्यांकन किया जाता है तथा होना यह चाहिए था कि जिन्होंने एमफिल की डिग्री प्राप्त कर ली है उन्हें भी पीएचडी के समकक्ष दर्जा प्राप्त हो क्योंकि किसी भी कानून/ विधि या नियम का प्रभाव भविष्यलक्षी होना चाहिए ,भूतलक्षी नहीं इस रूप में एमफिल डिग्री प्राप्त शोधार्थियों को पीएचडी डिग्री के समक्ष ही दर्जा प्राप्त हो। इस संदर्भ में नई शिक्षा नीति की  पुनर्समीक्षा की नितांत व महती  आवश्यकता है जो कि शीघ्र अति शीघ्र की जानी चाहिए जिससे कि एमफिल शोधार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ ना हो।

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3 Comments

  1. यहीं बात मैंने कहा था जब दक्षिण एशिया अध्ययन केंद्र में UGC की टीम ने विजीट किया था कि एक B. Ed. करा हुआ स्कूल व्याख्याता बन सकता है और एक नेट करा हुआ कालेज व्याख्याता बन सकता है लेकिन आप M.Phil करें हुए को किस श्रेणी में रखोगे ना तो वह स्कूल में और ना वह कालेज में पढ़ा सकता है, फिर इस कोर्स की क्या महत्ता रहीं।

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  2. यहीं बात मैंने कहा था जब दक्षिण एशिया अध्ययन केंद्र में UGC की टीम ने विजीट किया था कि एक B. Ed. करा हुआ स्कूल व्याख्याता बन सकता है और एक नेट करा हुआ कालेज व्याख्याता बन सकता है लेकिन आप M.Phil करें हुए को किस श्रेणी में रखोगे ना तो वह स्कूल में और ना वह कालेज में पढ़ा सकता है, फिर इस कोर्स की क्या महत्ता रहीं।

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  3. यहीं बात मैंने कहा था जब दक्षिण एशिया अध्ययन केंद्र में UGC की टीम ने विजीट किया था कि एक B. Ed. करा हुआ स्कूल व्याख्याता बन सकता है और एक नेट करा हुआ कालेज व्याख्याता बन सकता है लेकिन आप M.Phil करें हुए को किस श्रेणी में रखोगे ना तो वह स्कूल में और ना वह कालेज में पढ़ा सकता है, फिर इस कोर्स की क्या महत्ता रहीं।

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