"जब दिल ही टूट गया,हम जीकर क्या करेंगे" गाना इस सुपरस्टार गायक के जनाज़े में बजने की यह थी वजह

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भारतीय सिनेमा के गायक के तौर पर सबसे पहले सुपरस्टार का दर्ज़ा हासिल है सहगल को




आज हम आपके लिए लेकर आये हैं चन्द जानकारी उस गायक की जिसका पूरा देश दीवाना था..


प्रस्तुत है-


ज़मीं खा गई आसमां कैसे कैसे (चौथी कड़ी)



नरेंद्र बोहरा ✍🏻

जयपुर


गायक अभिनेता कुंदन लाल सहगल हिंदी सिनेमा के बतौर गायक पहले सुपरस्टार थे और उनके नाम एक पूरा युग है।

यह वह दौर था जब हर गायक उनकी शैली में गाने का प्रयास करता था। मुकेश और किशोर कुमार ने अपने पहले फिल्मी गीत सहगल की शैली में ही गाए। उनकी आवाज में एक अलग ही ओज और मिठास था और उस समय संगीत सुनने के साधन बहुत कम थे इसलिए लोग उनके गीत सुनने के लिए बार बार फिल्म देखते थे। 


उन्होंने बंगाली, पंजाबी और पश्तो में भी गीत गाए।गैर फिल्मी गीत और ग़ज़लें भी गाईं। उनके गीतों की संख्या बमुश्किल 200 रही होगी मगर फिर भी वे सर्वोपरि और अमर हैं। उन्होंने 27 हिंदी और 7 बंगला फिल्मों में अभिनय किया था।

  4अप्रैल 1904 को जन्मे सहगल को बचपन से ही संगीत में बहुत रुचि थी। हालांकि उन्होंने कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया मगर उन्होंने अभ्यास, अनुभव और प्रयोगों से सीखा राग भैरवी में उन्हें महारत हासिल थी और उसमें उन्होंने अद्भुत प्रयोग किए।


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1932 में सहगल कलकत्ता पहुंच गए जहां न्यू थियेटर्स का ज़बरदस्त बोलबाला था। उन्होंने उसके लिए पहले तीन फिल्मों में काम किया मोहब्बत के आंसू, जिंदादिल और सुबह का तारा मगर तीनों ही फ्लॉप रहीं। इसके बाद चंडीदास से उन्हें कुछ सफलता मिली और उनके गीत लोकप्रिय हुए। प्रथमेश बरुआ की देवदास(1935) ने उन्हें सफलता के शिखर पर पहुंचा दिया। फिर तो स्ट्रीट सिंगर, धरतीमाता,लग्न, दुश्मन, प्रेसीडेंट,पूर्ण भगत और करोड़पति जैसी फिल्मों ने सहगल को अपार ख्याति दिलाई और उनके गीतों का तो पूरा देश दीवाना हो गया।

कुछ वर्षों बाद नियति उन्हें मुंबई खींच ले ग‌ई। वहां उन्होंने भक्त सूरदास, तानसेन, भंवरा,परवाना और उम्र खैयाम जैसी फिल्मों ने और सफलता दिलाई।



उनकी अंतिम फिल्म थी ए आर कारदार की शाहजहां जिसमें नौशाद के संगीत में उन्होंने"ग़म दिए मुस्तकिल","हम जीकर क्या करेंगे", और"चाह बर्बाद करेगी" जैसे सदाबहार गीत गाए।

 इस फ़िल्म के गानों की रिकॉर्डिंग के सम्बंध में कई दिलचस्प किस्से मशहूर हैं। ऐसा कहा जाता है कि सहगल हमेशा शराब पीकर ही गाने रिकॉर्ड करवाते थे। एक दिन  नौशाद साहब को उनका गाना जमा नहीं तो अगले दिन के लिए टाल दिया। जब अगले दिन सहगल आए तो नौशाद ने उनसे विनम्रता से बिना शराब पिए गाने को कहा और वह गाना एक ही बार में ओके हो गया। यह गाना था--"जब दिल ही टूट गया, हम जीकर क्या करेंगे..!" उसी समय सहगल ने कह दिया कि मेरे जनाज़े में यही गाना बजाया जाए।

शराब के अत्यधिक सेवन से उनका स्वास्थ्य निरंतर बिगड़ता जा रहा था। उन्हें घर की याद सताने लगी और 1946 में वे मुंबई से जालंधर ग‌ए तो फिर कभी नहीं लौटे।ऑल इंडिया रेडियो पर  18 जनवरी 1947 को खबर आई कि सहगल नहीं रहे।लिवर के सिरोसिस से उनका देहांत हो गया।पूरा देश शोक में डूबा गया।उनकी शवयात्रा में उनकी इच्छा के मुताबिक उनका गीत"हम जी के क्या करेंगे" बजाया गया।

न्यू थियेटर्स के मालिक बी एन सरकार ने सहगल को श्रद्धांजलि स्वरूप एक फिल्म अमर सहगल का निर्माण किया।

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