देश मे ऐसा पहली बार- BARMER-रूढ़िवादी परंपरा को दरकिनार कर सात बेटियों ने अपने पिता की अर्थी को कंधा दे दी मुखाग्नि

देखा गया

राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर के महाबार गाँव ने पूरे देश मे पेश की मिसाल


पूर्व मुख्यमंत्री राजे सहित कई दिग्गज़ नेताओं ने जताया शोक

 मारवाड़ में शोक की लहर



मीडिया केसरी वेबडेस्क ✍🏻




बाड़मेर (राजस्थान)-29 नवंबर। जिले में रविवार को उस समय माहौल ग़मगीन हो गया जब अपने पिता की मौत पर सात बेटियों ने बेटों का धर्म निभाते हुए  अपने पिता की अंतिम यात्रा में उन्हें कंधा देते हुए मुक्तिधाम पहुँची और पिता को मुखाग्नि भी दी। 

देश मे ऐसा पहली बार हुआ है कि 7 बेटियों ने अपने पिता की अर्थी को कंधा देकर पूरे हिन्दू रीति-रिवाजों के साथ पिता को मुखाग्नि दी। 



रविवार को सरहदी बाड़मेर के महाबार गाँव के पूर्व सरपंच और विश्व विख्यात ब्रह्मधाम आसोतरा के आजीवन ट्रस्टी हेमसिंह राजपुरोहित का निधन जोधपुर में हो गया।  अंतिम यात्रा उनके पैतृक गांव महाबार में निकाली गई। इनकी अंतिम यात्रा ना केवल बाड़मेर बल्कि पूरे भारत मे मिसाल बनी नजर आई। हेमसिंह महाबार की सातो बेटियों ने अपने पिता को पूरी हिन्दू रस्मों के साथ अंतिम विदाई दी। 




 अक्सर देखने में आता है कि ग्रामीण इलाकों में आज भी समाज में बेटा-बेटी में फ़र्क समझा जाता है। बेटियों को बेटों के बराबर हक़ नहीं दिए जाते। ऐसे में रविवार को सरहदी बाड़मेर के महाबार गाँव मे रूढ़िवादी परम्परा को दरकिनार कर समाजसेवी हेमसिंह महाबार को उनकी सात बेटियों ने कन्धा देकर मुखग्नि दी। पिता की मौत के बाद गमगीन माहौल में बेटियों ने बेटों के फर्ज को पूरे रीति रिवाजों के साथ पूरा किया।

 83 वर्षीय हेमसिंह महाबार को उनकी बेटियों मगूकंवर, छगन कंवर, तीजो कंवर, पूरी कवर, सारी कवर ,घापू कवर,घाई कवर ने कंधा देने के बाद मुखाग्नि दी। हेमसिंह महाबार के 14 दोहिते 12 दोहितीया है। हेमसिंह महाबार पिछले दिनों कोरोना संक्रमित हो गए थे लेकिन उनकी रिपोर्ट कुछ दिन पहले नेगिटिव भी आ गई थी।



 बाड़मेर के समाजसेवी और माहाबार के पूर्व सरपंच हेमसिंह राजपुरोहित के निधन पर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने उनके दामाद भंवर सिंह राजगुरु बीसू से फोन पर बात कर अपनी संवेदना प्रकट की। हेमसिंह महाबार के निधन पर पूरे मारवाड़ में राजपुरोहित समाज मे शोक की लहर दौड़ पड़ी। बाड़मेर विधायक मेवाराम जैन समेत कई जनप्रतिनिधियों ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया।

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