सांभर में विकास की भावी संभावनाओं के लिए जो पोटेंशियल है, उसे देखते हुए यहां जिला मुख्यालय होना अति आवश्यक है- कैलाश शर्मा (वरिष्ठ पत्रकार)
Media Kesari
Jaipur
जनगणना के कारण प्रदेश की सभी प्रशासनिक सीमाएं फ्रीज हो गई हैं। 31 दिसंबर, 2025 को संभाग, जिला, उपखंड, तहसील, नगरपालिका, ग्राम पंचायत व गांव तथा वार्डों की जो सीमा थी, उनके अनुसार ही अब जनगणना का काम होगा। जनगणना का काम अगले वर्ष 2027 तक पूरा होगा, तब तक किसी नये राजस्व जिले का गठन नहीं होगा। अर्थात भजनलाल के नेतृत्व वाली प्रदेश की भाजपा सरकार भी दो वर्ष से अधिक की कार्य अवधि में सांभर को जिला नहीं बना पाई। इससे न केवल सांभर अंचल में रोष है, बल्कि आगामी नगरपालिका व पंचायत चुनावों में भाजपा को बड़े राजनीतिक नुकसान की आशंका भी है।
उम्मीद थी, लेकिन
राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने सांभर को जिला नहीं बनाया, लेकिन जब भजनलाल के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी तो उम्मीद थी कि यह सरकार सांभर को जिला बनायेगी। वर्ष 2024-25 व 2025-26 के राज्य बजट में यह घोषणा होगी, इसे लेकर उत्सुकता थी पर दो साल से अधिक का कार्यकाल निकल गया और अब तो जनगणना के कारण प्रशासनिक इकाइयों की सीमाएं फ्रीज हो गई हैं, अतः 2026-27 के राज्य बजट में सांभर को जिला बनाने की घोषणा होगी ऐसा नहीं लगता।
समझ नहीं पा रहे
दरअसल सांभर को जिला बनाने की बड़ी आवश्यकता है और इसे न तो प्रशासनिक अधिकारी समझ पा रहे और न ही चुने हुए जन प्रतिनिधि। उल्लेखनीय है कि आजादी के पहले सांभर ब्रिटिश शासन काल के दौरान जयपुर और जोधपुर दोनों रियासतों का जिला मुख्यालय था, लेकिन आजादी के बाद यह दर्जा छिन गया। कांग्रेस, जनता पार्टी और भाजपा तीनों राजनीतिक दलों के सांसद व विधायक सांभर को जिले का दर्जा दिलवाने में नाकाम रहे। इसकी वजह थी कि किसी भी सांसद या विधायक के दिल में सांभर के प्रति लगाव नहीं था, वरना नतीजा देने वाली कोशिश होती।
अब जरूरत इसलिए है
वरिष्ठ पत्रकार कैलाश शर्मा के अनुसार सांभर में इस समय सर्वोच्च प्रशासनिक इकाई उपखंड मुख्यालय है और इसके अधिकार सीमित होते हैं। सांभर में विकास की भावी संभावनाओं के लिए जो पोटेंशियल है, उसे देखते हुए यहां जिला मुख्यालय होना अति आवश्यक है। दूसरे सांभर झील का समग्र एरिया इस समय तीन जिलों जयपुर, डीडवाना और अजमेर में विभाजित है जबकि आवश्यकता इस बात की है कि रामसर साईट के महत्व को देखते हुए यह झील एक जिले में ही रहनी चाहिए, ताकि इसका प्रबंधन व बेहतर संरक्षण हो सके। तीसरी बड़ी बात हाल ही जो सांभर फेस्टिवल आयोजित किया गया था उसमें दस लाख से अधिक सैलानी पहुंचे हैं, यह मेला अगले तीन साल में पचास लाख से अधिक सैलानी वार्षिक आकृष्ट करने वाला हो जायेगा। सांभर चूंकि मल्टी वैरायटी टूरिज्म डेस्टीनेशन है, अतः इसका समेकित विकास तभी संभव है, जबकि यहां जिला मुख्यालय हो।
सरकार के लिए रैवेन्यू सोर्स
ईस्ट इंडिया कंपनी ने सांभर झील को 1830 में लीज पर लिया था और उसकी आय का यह सबसे बड़ा जरिया थी। उसके पहले जयपुर व जोधपुर रियासत तथा उनसे पहले मुगल सल्तनत के लिए आमदनी का बड़ा जरिया थी। पर आजादी के बाद जिला मुख्यालय न होने के कारण यह रैवेन्यू सोर्स सूख गया। अगर सांभर को जिला बना दिया जाता तो राजस्थान के इकोनोमिक ट्रांसफार्मेशन का यह बड़ा केंद्र बन सकता है। पर इस संभावना का दोहन करने से सब मुख्यमंत्री चूकते रहे। मोहनलाल सुखाडिया, हरिदेव जोशी, भैरोंसिंह शेखावत, शिवचरण माथुर, अशोक गहलोत, वसुंधरा राजे और अब भजनलाल। दो साल का मौका मिला था भजनलाल को, लेकिन वे भी चूक गए।
अब जनगणना के बाद क्या होता है, उसकी प्रतीक्षा है। पर सांभर को जिला न बनाने से राजस्थान का इकोनोमिक ट्रांसफार्मेशन जहां बाधित हो रहा है, वहीं भाजपा व भजनलाल दोनों के लिए राजनीतिक संकट भी पैदा हो सकता है।


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