World Autism Awareness Day: मेरा बच्चा सबसे अलग क्यों? ऑटिज्म को समझें,भ्रम मिटाएं!

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विश्व ऑटिज़्म जागरूकता दिवस / विश्व ऑटिज़्म स्वीकृति दिवस

गौतम हॉस्पिटल में दो दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम; विशेषज्ञों ने कहा- सही समय पर पहचान और थेरेपी ही बच्चों की ढाल

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जयपुर- विश्व ऑटिज्म दिवस (World Autism Awareness Day) के उपलक्ष्य में सिविल लाइंस स्थित गौतम हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर में दो दिवसीय विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गौतम हॉस्पिटल रिसर्च सेंटर (Gautam Hospital & Research Centre) एवं मेंटल हेल्थ फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में भावी मनोवैज्ञानिकों ने पोस्टर्स और संवाद के जरिए समाज को यह संदेश दिया कि ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों को सहानुभूति नहीं, बल्कि हमारे साथ और समझ की जरूरत है।

Media Kesari, latest news today, health news todayजयपुर- विश्व ऑटिज्म दिवस (World Autism Awareness Day) के उपलक्ष्य में सिविल लाइंस स्थित गौतम हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेंटर में दो दिवसीय विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गौतम हॉस्पिटल रिसर्च सेंटर एवं मेंटल हेल्थ फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में भावी मनोवैज्ञानिकों ने पोस्टर्स और संवाद के जरिए समाज को यह संदेश दिया कि ऑटिज्म से ग्रसित बच्चों को सहानुभूति नहीं, बल्कि हमारे साथ और समझ की जरूरत है।

इस आयोजन में एमिटी यूनिवर्सिटी, अपेक्स यूनिवर्सिटी और IIS यूनिवर्सिटी के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने पोस्टर्स के माध्यम से ऑटिज्म के कारणों, लक्षणों और इससे जुड़ी भ्रांतियों पर प्रकाश डालते हुए आमजन को जागरूक किया।

विशेषज्ञों की राय: क्या है ऑटिज्म और कैसे करें पहचान

 ऑटिज्म कोई श्राप नहीं, जन्मजात विकार है: डॉ. शिव गौतम

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए मनोविज्ञान चिकित्सा के एमेरिटस प्रोफेसर डॉ. शिव गौतम ने कहा-


ऑटिज्म एक जन्मजात न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसे अक्सर लोग समझ नहीं पाते। विश्व ऑटिज्म दिवस मनाने का असली मकसद उन बाधाओं को तोड़ना है जो इन बच्चों को समाज की मुख्यधारा से अलग करती हैं। समाज को यह स्वीकारना होगा कि ये बच्चे 'अलग' जरूर हैं, लेकिन 'अक्षम' नहीं।"

Media Kesari, latest news today, थेरेपी से संभव है बेहतर जीवन: डॉ. अनिता गौतम  "ऑटिज्म का कोई जादुई इलाज नहीं है, लेकिन सही थेरेपी और 'अर्ली इंटरवेंशन' (शुरुआती हस्तक्षेप) से बच्चों के जीवन में क्रांतिकारी सुधार लाया जा सकता है। बिहेवियरल थेरेपी और स्पीच थेरेपी बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने में सबसे कारगर साबित होती हैं।"

संस्थान के निदेशक डॉ. मनस्वी गौतम ने बच्चों में दिखने वाले शुरुआती संकेतों पर जोर देते हुए बताया:


यदि बच्चा नजरें नहीं मिलाता (Eye Contact), तेज रोशनी या आवाज के प्रति जरूरत से ज्यादा संवेदनशील है, या एक ही शब्द को बार-बार दोहराता है, तो इसे हल्के में न लें। सामाजिक कौशल का पूर्ण विकास न होना और संवाद में कमी इसके प्रमुख लक्षण हैं। सही समय पर पहचान ही बेहतर भविष्य की कुंजी है।"


थेरेपी से संभव है बेहतर जीवन: - डॉ. अनिता गौतम

"ऑटिज्म का कोई जादुई इलाज नहीं है, लेकिन सही थेरेपी और 'अर्ली इंटरवेंशन' (शुरुआती हस्तक्षेप) से बच्चों के जीवन में क्रांतिकारी सुधार लाया जा सकता है। बिहेवियरल थेरेपी और स्पीच थेरेपी बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने में सबसे कारगर साबित होती हैं।"


युवाओं ने मिटाईं भ्रांतियां

विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने प्रदर्शनी के माध्यम से बताया कि ऑटिज्म को लेकर समाज में कई गलत धारणाएं व्याप्त हैं। उन्होंने तथ्यों के जरिए स्पष्ट किया कि यह न तो छूने से फैलता है और ना ही यह खराब परवरिश का नतीजा है। कार्यक्रम के अंत में जन समुदाय को ऑटिज्म ग्रसित बच्चों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करने की शपथ दिलाई गई।





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